एमपी में फिर हुई बिजली महंगी, सरचार्ज 2.66 परसेंट बढ़ा,अगस्त के बिल से बढ़ेगा लोड

मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर मंहगाई की अब एक और मार पड़ी है. बिजली कंपनियों ने फ्यूल कास्ट एंड पावर पर्चस एडजस्टमेंट का हवाला देते हुए दाम बढ़ा दिए है ऐसे में अब प्रदेश के उपभोक्ताओं के बीच बिजली का खर्च और बढ़ जाएगा.
बिजली कंपनियों का कहना है कि ईंधन की मंहगाई के चलते यह कदम उठाना पड़ रहा है. अब जल्द ही बढ़े हुए बिजली के बिल भी उपभोक्ताओं तक पहुंचगेंए जो कि 200 से 300 यूनिट की खपत पर 35 से 87 रुपए तक अधिक होगें. खबर है कि एफसीपीपीए सरचार्ज 1.11 परसेंट से बढ़ाकर 3.77 परसेंट कर दिया गया है. यानी पिछले महीने की तुलना में उपभोक्ताओं पर 2.66 परसेंट अधिक सरचार्ज का बोझ पड़ेगा.
यह सरचार्ज बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर लागू होगा और प्रदेश के दो करोड़ से अधिक यूजर्स इससे प्रभावित होंगे. एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जुलाई 2026 के लिए फ्यूल और पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज 3ण्77 प्रतिशत निर्धारित किया गया है. यह निर्णय बिजली आपूर्ति और व्हीलिंग के टैरिफ से जुड़े रेगुलेशन.2021 तथा उसके संशोधित प्रावधानों के तहत लिया गया है. चीफ जनरल मैनेजर के निर्देशानुसार 24 जुलाई 2026 से यह सरचार्ज उपभोक्ताओं के एनर्जी चार्ज पर वसूला जाएगा. इसके लिए डिटेल जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है.
एक साल में 37 परसेंट तक बढ़ी डिमांड-
प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का असर बिजली उत्पादन पर भी पडऩे लगा है. जलाशयों में पानी की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय कई जगह 8 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है. जबलपुर और आसपास के जिलों के गांवों में भी रुक.रुककर बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इसका असर प्रदेश के 2 करोड़ और भोपाल के 1.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. बिजली कंपनियों के मुताबिक बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है. जबकि उत्पादन क्षमता पर दबाव है. 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 10024 मेगावाट थी जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13757 मेगावाट पहुंच गई. यानी एक साल में बिजली की मांग करीब 37 प्रतिशत बढ़ गई है.
कम बारिश से बढ़ा लोड-
विभाग के अनुसार पूर्वी मध्यप्रदेश के करीब 15 जिलों में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है. शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, मंडला, बालाघाट और सिवनी में पानी की कमी का असर बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है. जलाशयों में कम आवक के कारण बिजली उत्पादन सीमित करना पड़ रहा हैए जिससे बिजली व्यवस्था पर अधिक दबाव बना हुआ है.

















































