संडे एमपी मानसून अपडेट: डैम खाली, फसलें सूखी:अब तक 17.2 इंच बारिश; भोपाल-इंदौर समेत 50 जिलों में औसत से कम

मध्य प्रदेश में तेज बारिश का दौर थमा हुआ है। इस कारण प्रदेश के अधिकांश डैम खाली हैं और नदियां सूखी पड़ी हैं। बारिश नहीं होने का सबसे ज्यादा असर सोयाबीन, धान जैसी खरीफ फसलों पर हो रहा है। इंदौर-उज्जैन संभाग में सोयाबीन में इल्ली और रोग का असर बढ़ने लगा है, तो जबलपुर क्षेत्र में धान के खेत इतने सूख चुके हैं कि जमीन में दरारें पड़ गई हैं।
इस बार अगस्त महीने में स्ट्रॉन्ग सिस्टम की कमी देखी गई। साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और ट्रफ की एक्टिविटी जरूर रही, लेकिन वह इतने मजबूत नहीं रहे। इस कारण शुरुआती 8 दिन में पूरे प्रदेश में मानसून नहीं छाया।
कुछ ही जिलों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस वजह से 20% कम बारिश दर्ज की गई है। इंदौर, भोपाल, उज्जैन समेत 50 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। सिर्फ 5 जिलों में ही औसत से ज्यादा पानी बरसा है।
प्रदेश में 20% पानी कम गिरा
मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 17.2 इंच बारिश हो चुकी है। यह औसत बारिश 21.5 इंच से 4.3 कम है। यानी, प्रदेश में 20% पानी कम गिरा है। ऐसे में जलस्रोतों में पानी नहीं आया है।
कोलार, बाणसागर, कुंडालिया, बरना, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर, तिघरा समेत कई डैम आधे भी नहीं भरे हैं, जबकि पिछले साल जुलाई में ही डैम फुल हो गए थे।
अबकी बार सिर्फ बैतूल स्थित सतपुड़ा डैम के ही 7 गेट खुले हैं। डैमों में पानी नहीं आने से जलसंकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। वर्तमान में कई शहरों में पानी की नियमित सप्लाई भी नहीं हो रही है।

इस सप्ताह ग्वालियर में तेज बारिश हुई थी। कलेक्टर रुचिका चौहान घुटनों तक पानी में उतरीं।
इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया।
दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।
अगस्त के पहले दिन प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया। हालांकि, अगले सप्ताह से प्रदेश में फिर से तेज बारिश शुरू होगी। इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
बालाघाट में 26.3 इंच पानी गिरा, मुरैना में 9 इंच ही मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश बालाघाट में करीब 26.3 इंच हो चुकी है। सबसे कम पानी मुरैना में 9 इंच ही हुई है।
एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश
इन 50 जिलों में कम बारिश- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 5% से 49% तक कम बारिश हुई है।
वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में औसत से कम पानी गिरा है।
5 जिलों में ज्यादा बारिश- ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
ऐसे समझें बारिश का गणित…
- 20 इंच से ज्यादा- सीहोर, बुरहानपुर, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, देवास, हरदा, शहडोल, अनूपपुर।
- 10 से 20 इंच तक- भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, नर्मदापुरम, बैतूल और उमरिया।
- 10 से कम बारिश- मुरैना और रीवा।
मध्य प्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि जुलाई का आखिरी सप्ताह बेहतर रहा है। खासकर पश्चिमी हिस्से में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त का पहला सप्ताह भी ठीक रहा। औसत 2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। आने वाले दिनों में मानसून स्ट्रॉन्ग हो सकता है।
5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
- भोपाल: भोपाल में अब तक कोटे की आधी यानी, 19.2 इंच बारिश ही हुई है। संभाग के बाकी जिले- सीहोर, राजगढ़, रायसेन और विदिशा में कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई। इस सप्ताह तेज बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में आंकड़े में सुधार हो सकता है।
- इंदौर: यहां 17.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे की 52 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा बुरहानपुर में 23 इंच बारिश हो चुकी है। आलीराजपुर में सबसे कम पानी गिरा है। अगले सप्ताह तेज बारिश होने के कम आसार है।
- जबलपुर: जबलपुर में भी सूखे जैसे हालात है। यहां पर कोटे की एक तिहाई 16.8 इंच बारिश ही हुई है। बालाघाट में सबसे ज्यादा 26 इंच पानी गिर चुका है। सिवनी में करीब 22 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। अगले सप्ताह तेज बारिश होती है तो आंकड़े में सुधार आ सकता है।
- उज्जैन: शाजापुर को छोड़ दें तो संभाग के बाकी जिलों में कोटे से आधी बारिश भी नहीं हुई है। उज्जैन में सिर्फ 16.3 इंच पानी गिरा है। सिस्टम एक्टिव रहा तो इस सप्ताह तेज बारिश का दौर रह सकता है।
- ग्वालियर: ग्वालियर में अब तक 16.6 इंच बारिश हुई है, जो कोटे की 58 प्रतिशत है। गुना में अब तक 18.7 इंच पानी गिर चुका है, लेकिन संभाग के शिवपुरी, दतिया और अशोकनगर की स्थिति ठीक नहीं है।















































