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एमपी के 20 से ज्यादा जिलों में बारिश:नरसिंहपुर में 3, श्योपुर में 2.8 इंच पानी गिरा; शिवपुरी में नदी-नाले उफान पर, गांवों में घुसा पानी

मध्य प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में 24 घंटे के दौरान बारिश हुई। नरसिंहपुर में सबसे ज्यादा 3 इंच पानी गिर गया। श्योपुर में 2.8 इंच, रीवा में 2.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई।

इसके अलावा शिवपुरी, सीधी, नर्मदापुरम, बालाघाट, छतरपुर, सागर, गुना, रायसेन, नर्मदापुरम, मंडला, ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़, उमरिया, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सतना, शाजापुर समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर रहा।

शिवपुरी जिले में शुक्रवार रात तेज बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए। पिछोर इलाके में रात 1 से 3 बजे तक हुई भारी बारिश के बाद महुअर नदी का जल स्तर बढ़ गया। इससे खोड़-पिछोर मार्ग बंद हो गया और गुरुकुदवाया समेत कई गांवों में पानी घुस गया। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, प्रदेश में अब तक औसत 16.8 इंच बारिश हुई है, जबकि 21 इंच पानी गिर जाना था। इस तरह 4.2 इंच यानी, 20 प्रतिशत बारिश कम हुई है। इस सीजन में अब तक हुई बारिश कोटे की आधी भी नहीं है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है।

देखिए बारिश की तस्वीरें…

जिले में शुक्रवार रातभर बारिश से बाढ़ से हालात हैं। एक स्कूल में पानी भर गया।

जिले में शुक्रवार रातभर बारिश से बाढ़ से हालात हैं। एक स्कूल में पानी भर गया।

पिछोर में रात 1 से 3 बजे तक हुई भारी बारिश के बाद महुअर नदी का जल स्तर बढ़ गया।

पिछोर में रात 1 से 3 बजे तक हुई भारी बारिश के बाद महुअर नदी का जल स्तर बढ़ गया।

खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

डिंडौरी में एक सप्ताह बाद आधे घंटे तेज बारिश हुई।

डिंडौरी में एक सप्ताह बाद आधे घंटे तेज बारिश हुई।

24 घंटे के दौरान श्योपुर में 2.8 इंच बारिश हुई।

24 घंटे के दौरान श्योपुर में 2.8 इंच बारिश हुई।

इन 29 जिलों में कम बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है। एक भी जिला ऐसा नहीं है, जो आगे हो।

अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 5% से 48% तक कम बारिश हुई है।

वहीं, पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में औसत से कम पानी गिरा है।

6 जिलों में ज्यादा बारिश

IMD की माने तो पश्चिमी हिस्से के ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम

मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड…

भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड

भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं।

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