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भोपाल समेत कई जिलों में बारिश, बाढ़ में पुलिया बही:खरगोन का कुंदा जलप्रपात उफान पर, एंट्री बंद; 4 दिन भारी बारिश के आसार नहीं

भोपाल, रतलाम समेत कई जिलों में शनिवार को बारिश हुई। खरगोन के सतावड़ में दिवाली और बंधान नदी की बाढ़ से पुरानी पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद शुक्रवार से गांव का संपर्क टूटा हुआ है। लोगों को तीन और चार पहिया वाहनों से आने-जाने के लिए 17 किमी का अतिरिक्त फेर लगाना पड़ रहा है।

उधर, सिरवेल महादेव स्थित कुंदा जलप्रपात उफान पर होने से श्रद्धालुओं की एंट्री बंद कर दी गई है। वहीं, मध्य प्रदेश में जुलाई का वर्षा कोटा पूरा हो गया है, लेकिन प्रदेश अब भी सामान्य से 13% कम बारिश पर है। अगले चार दिन भारी बारिश के आसार नहीं हैं।

भोपाल, रतलाम और ग्वालियर में बारिश

भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। रतलाम में शनिवार सुबह से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। जिले में अब तक 13 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। लगातार बारिश से शहर का हनुमान ताल लबालब भर गया है।

जुलाई महीने का वर्षा कोटा भी पूरा हो गया। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस बार अब तक करीब 9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। ग्वालियर में भी शनिवार दोपहर तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को उमस और चिपचिपी गर्मी से राहत मिली।

देखिए बारिश की तस्वीरें…

रतलाम में शनिवार सुबह से बारिश हो रही है। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। शहर का हनुमान ताल लबालब भर गया है।

रतलाम में शनिवार सुबह से बारिश हो रही है। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। शहर का हनुमान ताल लबालब भर गया है।

दो दिन की तेज बारिश के बाद खरगोन में कुंदा जलप्रपात उफान पर है। सिरवेल महादेव में श्रद्धालुओं की एंट्री बंद कर दी गई है।

दो दिन की तेज बारिश के बाद खरगोन में कुंदा जलप्रपात उफान पर है। सिरवेल महादेव में श्रद्धालुओं की एंट्री बंद कर दी गई है।

ग्वालियर में शनिवार दोपहर तेज बारिश हुई।

ग्वालियर में शनिवार दोपहर तेज बारिश हुई।

खरगोन में 24 घंटे में ढाई इंच बारिश

खरगोन जिले में बीते 24 घंटे में औसतन 57 मिमी (करीब ढाई इंच) बारिश दर्ज की गई। झिरनिया में सबसे ज्यादा 96 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा गोगांव में 90 मिमी, कसरावद में 80 मिमी, महेश्वर में 65 मिमी, सेगांव में 48 मिमी, भीकनगांव और सनावद में 47-47 मिमी, बड़वाह में 44 मिमी तथा खरगोन शहर में 32 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

अगले चार दिन भारी बारिश के आसार नहीं

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में पिछले दो दिन से सक्रिय तीन मजबूत मौसम प्रणालियां अब कमजोर पड़ रही हैं। इसके चलते अगले चार दिन कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, यदि नया सिस्टम सक्रिय होता है तो कुछ इलाकों में भारी या अति भारी बारिश हो सकती है।

जुलाई का वर्षा कोटा पूरा, फिर भी प्रदेश 13% पीछे

दो लंबे बारिश के ब्रेक के बावजूद जुलाई में प्रदेश का औसत वर्षा कोटा पूरा हो गया। हालांकि जून में कम बारिश होने के कारण अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 390.3 मिमी (15.4 इंच) वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि तक 448.4 मिमी (17.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश अब भी सामान्य से 13% पीछे है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 15% और पश्चिमी हिस्से में 11% कम बारिश दर्ज की गई है। अगस्त में अच्छी बारिश होने पर यह कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है।

42 जिलों में सामान्य से कम बारिश

अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, भोपाल, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं, मऊगंज, उमरिया, शहडोल, टीकमगढ़, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, राजगढ़ और सीहोर में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है।

जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड…

इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बनाया था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है।

भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं।

ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। इस महीने की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है।

जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी, वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी।

जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो साल 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी।

उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।

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