एमपी के सरकारी इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र चोरी से हड़कंप, चौथे सेमेस्टर की परीक्षा रद्द

भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में प्रश्न पत्र चोरी का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के चौथे सेमेस्टर की कंप्यूटर विषय की परीक्षा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी. घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया. मामले की सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है.
जानकारी के अनुसार चौथे सेमेस्टर के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की कंप्यूटर विषय की परीक्षा शुक्रवार सुबह 11 बजे आयोजित होनी थी. छात्र निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि परीक्षा स्थगित कर दी गई है. कुछ समय बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी कार्यालय से नौ सीलबंद लिफाफे, जिनमें गोपनीय प्रश्नपत्र रखे गए थे, चोरी हो गए हैं. प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर घटना के बाद परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया.
पुलिस के अनुसार अज्ञात व्यक्ति खिड़की के रास्ते कार्यालय में घुसा और परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्रों से भरे सीलबंद लिफाफे लेकर फरार हो गया. सुबह जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा की तैयारी शुरू की, तब चोरी की जानकारी सामने आई. इसके बाद तत्काल गांधीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके.
विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक शर्मा ने परीक्षा रद्द होने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई जा रही है. उन्होंने स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक अर्चना तिवारी तथा स्नातकोत्तर परीक्षा नियंत्रक को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं. नोटिस में कहा गया है कि 3 जुलाई को विश्वविद्यालय स्तरीय स्नातकोत्तर परीक्षा के प्रश्नपत्र विभाग से अनधिकृत रूप से चोरी अथवा लीक हो गए, जो अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है. इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था, गोपनीयता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि परीक्षा नियंत्रक के रूप में प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी. ऐसे में इस घटना ने परीक्षा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर दिया है. इसलिए निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है.
घटना के बाद छात्र संगठनों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने प्रश्नपत्र चोरी की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की है. दोनों संगठनों ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करने की भी घोषणा की है.
वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदेश में चोरी सामान्य बात बन गई है और अब छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है. उनके अनुसार यह केवल प्रश्न पत्रों की चोरी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की मेहनत, विश्वास और भविष्य के साथ खिलवाड़ है. फिलहाल पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की जांच में जुटे हैं तथा प्रश्नपत्र चोरी के पीछे शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
















































