महाकाल से ओंकारेश्वर तक बनेगा आस्था का महापथ, मालवा-निमाड़ में आकार ले सकता है देश का अनोखा धार्मिक सर्किट

उज्जैन/भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रमुख देवस्थानों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल करने के संकेत के बाद मालवा-निमाड़ क्षेत्र में एक नए धार्मिक सर्किट के निर्माण की संभावनाएं तेज हो गई हैं। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, हरसिद्धि शक्तिपीठ, गढ़कालिका मंदिर, खंडवा जिले के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा आगर-मालवा स्थित मां बगलामुखी धाम को जोड़ते हुए प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली धार्मिक सर्किट विकसित हो सकता है।
पर्यटन विभाग के स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर प्रारंभिक विचार-विमर्श शुरू हो गया है। इस धार्मिक सर्किट की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें सनातन परंपरा के तीन प्रमुख आयाम—ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और सिद्धपीठ—एक ही यात्रा मार्ग में शामिल होंगे। देश के अधिकांश धार्मिक सर्किट किसी एक धार्मिक धारा पर आधारित हैं, जबकि प्रस्तावित मालवा-निमाड़ सर्किट शिव, शक्ति और तंत्र साधना की परंपराओं को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगा।
धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सर्किट के विकसित होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। वर्तमान में लाखों श्रद्धालु अलग-अलग अवसरों पर इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं, लेकिन एकीकृत यात्रा पैकेज और तीर्थदर्शन योजना के माध्यम से इन्हें जोड़ने से श्रद्धालुओं का ठहराव बढ़ेगा। इससे होटल उद्योग, परिवहन व्यवसाय, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, प्रसाद कारोबार और छोटे व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
प्रस्तावित सर्किट पांच जिलों को जोड़ने वाला धार्मिक मार्ग होगा। इसकी एक बड़ी खासियत यह भी है कि अधिकांश स्थान पहले से ही सड़क संपर्क और पर्यटन अधोसंरचना से जुड़े हुए हैं, जिससे इसे विकसित करने में अपेक्षाकृत कम समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह सर्किट मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिला सकता है। यदि योजना को अंतिम रूप मिलता है तो श्रद्धालु एक ही यात्रा में महाकाल, ओंकारेश्वर, हरसिद्धि माता, गढ़कालिका और मां बगलामुखी के दर्शन कर सकेंगे।
प्रमुख स्थल
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन
- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, खंडवा
- हरसिद्धि शक्तिपीठ, उज्जैन
- गढ़कालिका सिद्धपीठ, उज्जैन
- मां बगलामुखी धाम, नलखेड़ा (आगर-मालवा)














































