Success Story: 8 घंटे पुलिस विभाग में ड्यूटी; फिर पढ़ाई, CSIR परीक्षा में ऑल इंडिया 73वीं रैंक हासिल कर निलेश बने युवाओं के प्रेरणास्रोत

Ratlam News: मप्र के रतलाम शहर में पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत निलेश सिंगाड ने कड़ी मेहनत के बल पर ‘एलिजिबल फॉर अस्सिटेंट प्रोफेसर’ (CSIR NET EXAM DECEMBER 2025) की परीक्षा में ऑल इंडिया 73 रैंक हासिल कर एक प्रेरणा से परिपूर्ण मिसाल पेश की है। रतलाम शहर में ट्रैफिक पुलिस में आरक्षक के पद पर तैनात निलेश की इस सफलता की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रहे हैं। निलेश ने समय के अभाव के बावजूद कड़ी मेहनत के बल पर यह सफलता हासिल कर साबित कर दिया कि आप अगर सपने देखते हो और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हो तो मंजिल अवश्य मिलती है।
8 घंटे ट्रैफिक पुलिस में ड्यूटी करने के बाद घर जाकर करते थे पढ़ाई
निलेश सिंगाड ने अपनी सफलता के बारे में बातचीत करते हुए बताया कि वह प्रतिदिन ट्रैफिक पुलिस थाने में 8 घंटे ड्यूटी करते हैं। ड्यूटी के बाद घर पर प्रतिदिन कई कई घंटे लगातार पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पुलिस विभाग में ड्यूटी पर तैनात सीनियर ऑफिसर सूबेदार अनोखी लाल परमार को दिया। निलेश ने कहा कि उन्होंने पुलिस में जॉइनिंग के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन उनके साथ पुलिस विभाग में कार्यरत सूबेदार अनोखी लाल परमार द्वारा उन्हें कंपटीशन एग्जाम की तैयारी के लिए मोटिवेट किया गया। उनके मोटिवेशन की वजह से ही आज मुझे ऑल इंडिया 73वीं रैंक हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे मेरी पत्नी और परिवार का भी अहम रोल रहा है। निलेश की इस सफलता पर पूरे पुलिस महकमे और रतलाम जिले में खुशी की लहर है।
निलेश ने युवाओं को दिया कड़ी मेहनत करने का संदेश
निलेश सिंगाड ने कड़ी मेहनत के बल पर परेशानियों को दरकिनार करते हुए आज ऑल इंडिया 73वीं रैंक हासिल कर रतलाम जिले का प्रदेश में नाम रोशन करने का काम किया है। निलेश का जन्म तो झाबुआ जिले में हुआ था लेकिन उनकी पढ़ाई-लिखाई रतलाम शहर में ही हुई। निलेश के पिता भी पुलिस डिपार्टमेंट में एएसआई के पद से रिटायर हो चुके हैं। निलेश ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। इसलिए हमें परेशानियों का हवाला ना देकर कड़ी मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने स्वयं भी पुलिस विभाग में ड्यूटी करने के साथ-साथ कड़ी मेहनत की थी, जिसकी बदौलत आज उन्हें यह सफलता मिली है।


























