एमपी में सड़कों पर ई-रिक्शा की मनमानी होगी खत्म… जल्द आएगी नई नीति, रूट और कलर कोड से तय होगा संचालन
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत ई-रिक्शा चलाने के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं होती है। इस कारण रूट भी निर्धारित नहीं हैं। ऐसे में इंदौर सहित कई बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इंदौर में पुलिस-प्रशासन ने यातायात व्यवस्थित करने के लिए कुछ रूट निर्धारित किए हैं पर अब प्रदेश भर में ऐसी व्यवस्था प्रभावी करने की तैयारी है। इसके लिए सरकार नीति ला रही है।
इसमें रिक्शा को अलग-अलग कलर कोड दे दिया जाएगा। इस आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन से रंग का रिक्शा किस रूट पर चलेगा। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर राज्य शासन को भेजा है। इसी माह इस पर निर्णय हो सकता है।
नई नीति में कलेक्टरों को मिलेगी जिम्मेदारी
परमिट नहीं होने पर भी यातायात प्रबंधन की दृष्टि से ई-रिक्शा संचालन के संबंध में स्थानीय व्यवस्था के दृष्टिगत कलेक्टर रूट निर्धारण और अन्य कार्य कर सकते हैं। इसी कारण नई नीति में उन्हें जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही, राज्य स्तरीय नीति में सभी जिलों के लिए एक समान रूपरेखा बनाई जाएगी। इस तरह जिला प्रशासन और पुलिस मिलकर ई-रिक्शा संचालन पर नियंत्रण रखेंगे।
जिला प्रशासन और पुलिस मिलकर रखेंगे नियंत्रण
परिवहन आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि कई राज्यों में ई-रिक्शा संचालन व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया है। बता दें, प्रदेश में ई-रिक्शा की संख्या बीते 10 वर्ष में 141 से बढ़कर एक लाख सात हजार तक पहुंच चुकी है। प्रतिवर्ष लगभग 25 हजार ई-रिक्शा बढ़ रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले ऑटो के लिए भी रूट निर्धारित नहीं होते थे, जिससे अव्यवस्था होने लगी तो वर्ष 2021 में उनके लिए नीति बनाकर रूट निर्धारण किया जाने लगा। प्रदेश में 20 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो हैं।















































