कारोबार

साढ़े पांच माह में चांदी 1.75 लाख, सोना 36 हजार रुपये हुआ सस्ता, निवेशक चिंतित

अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच मूल्यवान धातु सोना-चांदी के भाव लगातार जमीन पर आ रहे हैं। जनवरी में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद शुरू हुआ गिरावट का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब साढ़े पांच माह में चांदी 1.75 लाख रुपये प्रतिकिलो और सोना 36 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।

हर दिन बदलते भाव से स्थानीय सराफा बाजार में कामकाज की चाल भी बेपटरी हो गई है। ऊंचे भाव पर खरीदी करने वाले निवेशकों की चिंता बढ़ रही है, जबकि कारोबारी मौजूदा भाव को नई खरीदी और निवेश के लिए बेहतर अवसर बता रहे हैं।

शुक्रवार के बाद सोमवार को खुले अंतरराष्ट्रीय बाजार ने सोना-चांदी में निवेश करने वालों को फिर तगड़ा झटका दिया। एमसीएक्स (मशीन) पर चांदी 217277 से 221272 रुपये प्रतिकिलो और सोना 141557 से 142702 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार करते देखा गया। स्थानीय हाजर बाजार में चांदी 223700 रुपये प्रतिकिलो और सोना 141700 रुपये प्रति 10 ग्राम बिका। वहीं आरटीजीएस (बिल) में चांदी 225100 रुपये प्रतिकिलो और सोना 146300 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

रिकॉर्ड स्तर से बड़ी गिरावट

जनवरी 2026 में चांदी ने करीब चार लाख रुपये प्रतिकिलो और सोने ने 1.82 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छुआ था। इसके बाद बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा। वर्तमान भाव की तुलना रिकार्ड स्तर से करें तो चांदी करीब 1.75 लाख रुपये प्रतिकिलो और सोना करीब 36 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है। इस बड़ी गिरावट से उन निवेशकों की सांसें ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिन्होंने तेजी के दौर में ऊंचे भाव पर बड़ी मात्रा में खरीदी की थी।

नई खरीदी के लिए अवसर

व्यवसायी ऋषभ संघवी और प्रतीक जैन का कहना है कि मौजूदा भाव खरीदी और निवेश करने वालों के लिए अच्छा अवसर है। साढ़े पांच माह में दोनों मूल्यवान धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि लगातार घटते भाव के कारण बाजार में खरीदार भी संभलकर कदम उठा रहे हैं। जानकारों के अनुसार सोना-चांदी की आगे की चाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।

वैश्विक तनाव बढ़ने और सुरक्षित निवेश की मांग लौटने पर भाव को सहारा मिल सकता है। वहीं बिकवाली का दबाव जारी रहने पर गिरावट का दौर आगे भी बना रह सकता है। फिलहाल तेज उतार-चढ़ाव के कारण बाजार की दिशा को लेकर असमंजस है। गिरावट लंबी खिंची तो स्थानीय सराफा कारोबार के लिए स्थिति चिंताजनक हो सकती है, जबकि निचले भाव पर खरीदी बढ़ने से बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है।

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