मध्यप्रदेश

MP को अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- सरकार रोक नहीं पा रही तो अर्धसैनिक बल तैनात करेंगे

 चंबल नदी से हो रहे रेत के अवैध उत्खनन पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ ने कहा कि संरक्षित राष्ट्रीय घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। अगर राज्य सरकार अपराधियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने व अवैध रेत उत्खनन पर रोक नहीं पा रही है, तो अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत उत्खनन को न सिर्फ कानून का उल्लंघन बताया, बल्कि पर्यावरण, चंबल नदी में पाए जाने वाले घड़ियाल, डॉल्फिन, दुर्लभ कछुओं के अलावा अन्य जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र, राजस्थान व उप्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि चंबल नदी के जिन घाटों से रेत का उत्खनन हो रहा है, ऐसे संवेदनशील इलाकों के अलावा अवैध रेत का परिवहन करने वाले रास्तों पर अच्छी गुणवत्ता (हाई रिजोल्यूशन) सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।

GPS डिवाइस और 24 घंटे गश्त के निर्देश

रेत के अवैध उत्खनन में उपयोग हो रहे सभी वाहनों व मशीनों में जीपीएस डिवाइस अनिवार्य तौर पर लगवाई जाए, जिससे रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन करने वालों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। कोर्ट ने पुलिस के साथ मिलकर वन विभाग को 24 घंटे गश्त करने के निर्देश दिए हैं। अवैध उत्खनन व परिवहन में लिप्त वाहनों को जब्त कर राजसात जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने कड़ी नाराजगी और चेतावनी के साथ प्रशासन के लिए कहा कि किसी भी स्तर का अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारी पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, जिसमें जवाबदेही से बचने का मौका नहीं मिलेगा। इस मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

अवैध उत्खनन करने वालों से हो नुकसान की वसूली

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अवैध रेत उत्खनन कर चंबल नदी, पर्यावरण व जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाने वालों पर ‘पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल’ के तहत वसूली की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि ‘पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल’ एक पर्यावरण नीति है, जिसके अनुसार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले या प्रदूषण फैलाने वाले से ही नुकसान का खामियाजा लिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत उत्खनन के दोषियों से मुआवजा वसूला जाए, जिससे पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित हो सके।

मुरैना में अर्धसैनिक बल और ड्रोन तैनात

रेत के अवैध उत्खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। 8 अप्रैल को वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की रेत भरे ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर हत्या के बाद से सुप्रीम कोर्ट अवैध रेत के कारोबार को रोकने को लेकर सख्त है। इससे पहले 13 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, जिसमें चंबल के मुख्य पुल तक की जड़ों से हो रहे अवैध उत्खनन पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। उसका असर यह हुआ कि सरकार ने 13 अप्रैल को ही मुरैना को अर्धसैनिक बल एसएएफ के 94 जवान दे दिए।

हाई-टेक निगरानी और कार्रवाई शुरू

इन जवानों को 14 अप्रैल से चंबल के राजघाट से लेकर उन रास्तों पर 24 घंटे के लिए तैनात कर दिया है, जहां से रेत का अवैध परिवहन होता है। रेत की मंडियों पर कार्रवाई से लेकर सबलगढ़ व अंबाह ब्लॉक के लिए भी अर्धसैनिक बल के दो दर्जन से अधिक जवान दिए गए हैं, जो स्थानीय थानों के पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे। दो ड्रोन व मोटरबोट के गश्ती दल द्वारा चंबल के घाटों की औचक सर्चिंग हो रही है। चार स्थानों पर हाई रिजोल्यूशन कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। मुरैना वन विभाग, पुलिस व राजस्व विभाग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भी यह जानकारी रखी है।

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