कभी बंगाल में चलता था दीदी का सिक्का, अब हाथ से निकली सत्ता, जानें TMC के हार की 5 बड़ी वजहें

West Bengal Election News: पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने वाली है और इस बार पश्चिम बंगाल में मोदी मैजिक चल गया है। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट भी छीन ली है और यहां से ममता बनर्जी 15000 वोट से हार गई है।
एक तरफ बीजेपी की प्रचंड जीत हुई है वहीं दूसरी तरफ टीएमसी के द्वारा वोट लूट का आरोप लगाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटों की लूट की है। ममता बनर्जी ने गृह मंत्री और प्रधानमंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
ममता बनर्जी ने जोर जबरदस्ती से SIR करने का आरोप लगाया है और उन्होंने कहा कि काउंटिंग एजेंट को गिरफ्तार किया गया लेकिन हम फिर से वापसी करेंगे। लगातार 15 साल तक ममता बनर्जी सत्ता में रही लेकिन अचानक ममता के हाथ से उनकी सीट भी चली गई। तो आईए जानते हैं ममता बनर्जी के हार की मुख्य वजह…
महिला सुरक्षा
पश्चिम बंगाल में लंबे समय से महिलाओं के द्वारा ममता बनर्जी का सपोर्ट किया जा रहा था क्योंकि ममता बनर्जी के द्वारा महिलाओं के लिए कई शानदार योजनाएं चलाई जाती है। लेकिन इस बार ममता बनर्जी को महिलाओं का सपोर्ट नहीं मिला और इसका सबसे बड़ा कारण रहा है महिला सुरक्षा का मुद्दा। आरजीकर रेप केस ममता बनर्जी के हार का मुख्य कारण बन गया है।
आरजीकर रेप विक्टिम की मां को भाजपा ने टिकट दिया था और उन्हें प्रचंड जीत मिली है। वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के मन में टीएमसी को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे थे कि क्या टीएमसी के शासन में महिलाएं सुरक्षित है क्योंकि संदेशखाली जैसा मुद्दा भी इस चुनाव में गरमाया।
SIR फैक्टर
मतदाता सूची के गहन निरीक्षक यानी SIR प्रक्रिया के दौरान 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए और अब यह काफी साफ हो गया है कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान टीएमसी को हुआ है।
संदेशखाली केस
संदेशखाली केस ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। इस मुद्दे पर ममता बनर्जी सफल रही जिसके बाद लोगों के मन में गुस्सा भरने लगा था और इस बार टीएमसी का हार का यह भी वजह बन गया।
केंद्रीय बलों की अभूतपूर्व तैनाती
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और दूसरे विपक्षी दल भाजपा पर केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में परंपरागत तौर पर चुनाव के दौरान सत्ताधारी पार्टी को फायदे मिलते रहे हैं लेकिन इस बार तृणमूल कांग्रेस को फायदा नहीं मिला है क्योंकि इस बार केंद्रीय बलों के द्वारा कड़ी सुरक्षा और निगरानी रखी गई थी। इस बार वोटो की हेरा फेरी नहीं हो पाई।


























