Mamata Banerjee: ‘स्ट्रीट फाइटर’ से सत्ता की महारानी, अब क्यों डगमगाई कुर्सी? जानें TMC के पिछड़ने की इनसाइड स्टोरी

Mamata Banerjee: बंगाल इलेक्शन के रुझान आने शुरू हो गए हैं और कई सीटों पर बीजेपी काफी बढ़त बनाई हुई है वहीं लंबे समय से बंगाल के सत्ता में अपनी जड़े जमाऐ रखने वाली टीएमसी की कुर्सी डगमगाने लगी है। इस बार सबकी नजर बंगाल चुनाव पर था और बंगाल चुनाव के रुझान आते ही बीजेपी की जबरदस्त जीत के संकेत मिल रहे हैं। ममता बनर्जी अपनी साख की सबसे बड़ी लड़ाई हारती नजर आ रही है। 2026 के चुनावी समर में उमड़ी बदलाव की लहर ने दीदी के अभेद दुर्ग का किला हिला दिया है। तो आईए जानते हैं दीदी के महारानी बनने की कहानी…
मात्र 18 की उम्र में ममता बनर्जी ने हिला दिया था देश की सियासत
ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह कम उम्र से ही राजनीति से जुड़ गई थी और राजनीति में उनके तेवर साफ दिख रहे थे। फाइटर होने की पहली गंज 20 जनवरी 1975 को सुनाई दी जब 18 साल की ममता बनर्जी जयप्रकाश नारायण की कार के बोनट पर कूद गई थी। इस घटना के बाद पूरे देश में ममता बनर्जी चमक गई।
इसके बाद 1984 में कांग्रेस ने उन्हें दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी के खिलाफ मैदान में उतारा और सबसे बड़ी बात थी कि इतने कम उम्र में एक युवा लड़की ने सोमनाथ चटर्जी जैसे बड़े राजनेता को हरा दिया था। यहीं से ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर शुरू हुआ।
संसद में नरमुंड और जॉर्ज का पड़ा कॉलर
1984 के जीत के बाद ममता बनर्जी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 1998 में वह एक बड़ा राजनीतिक चेहरा बन गई थी और पूरी दुनिया को सन कर दी। बंगाल में वामपंथी हिस्सा के खिलाफ आवाज उठाते हुए ममता बनर्जी ने संसद में नरमुंड बिखेर दिया था क्योंकि वह बताना चाहती थी कि बंगाल में वामपंथी हिंसा काफी बढ़ चुका है। उनके इस खतरनाक कम से पूरी दुनिया हैरान रह गई थी इसके बाद महिला आरक्षण बिल के बहस के दौरान उन्होंने गुस्से में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का कॉलर पकड़ लिया था। ममता बनर्जी के इस कदम ने साबित कर दिया था कि वह एक फाइटर है।
आखिर क्यों दरक गया ममता बनर्जी का किला
लंबे समय से फाइटर की छवि रखने वाली ममता बनर्जी इस बार अपनी कुर्सी बचाने में नाकामयाब दिख रही है। ममता बनर्जी के हाथ से बंगाल की सट्टा निकलती दिख रही है। ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस के ऊपर भ्रष्टाचार के लंबे समय से आप लग रहे हैं।
शिक्षक भर्ती घोटाला का असर
शिक्षक भर्ती घोटाला में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनके करीबियों के पास से करोड़ों की संपत्ति बरामद हुई जिससे ममता बनर्जी के इमेज पर एक गलत असर पड़ा। इसके बाद ममता बनर्जी के कई नेताओं को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया।
आरजीकर रेप केस भी बना हार का कारण
बंगाल में लंबे समय से भ्रष्टाचार बढ़ चुका था। वहीं दूसरी तरफ आजकल मेडिकल कॉलेज में बलात्कार की घटना ने भी ममता बनर्जी के छवि पर नकारात्मक असर डाला। इसके बाद पश्चिम बंगाल में यह आवाज उठने लगा कि क्या बंगाल में अब महिलाएं सुरक्षित नहीं है क्योंकि इस वीभत्स घटना ने महिलाओं के विश्वास को हिला दिया।
संदेशखाली मामला ने हिलाया ममता बनर्जी का नींव
वहीं दूसरी तरफ संदेश खाली में शेख शाहजहां और उनके समर्थकों पर महिलाओं का उत्पीड़न करके जमीन हड़पने का आरोप लगा। ममता बनर्जी अक्षर माँ माटी मानुष का नारा देती रही लेकिन उनके ही राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं रही। ममता बनर्जी के स्ट्रांग एक्शन नहीं लेने के वजह से भी बंगाल के जनता में काफी मायूसी देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदर भी काफी बगावत देखने को मिल रही है। इन सभी मुद्दों ने ममता बनर्जी को चुनाव में काफी नुकसान पहुंचाया।
























