एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस में फंसी, 12 घायल:पैसेंजर ने बताया- विमान 3 मिनट पलटी खाता रहा, कई लोगों के पैर-कंधे में चोट

थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट AI2379 मंगलवार को टर्बुलेंस, यानी तेज हवा के झटकों में फंस गई। अचानक कई फीट तक नीचे आ गई। हालांकि, पायलट ने स्थिति संभाली और फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हादसे में यात्री और क्रू मेंबर्स समेत 12 लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ को दिल्ली एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर और 7 घायलों को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
एअर इंडिया ने पहले बताया था कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।
फ्लाइट में सवार एक यात्री ने दावा किया कि उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद तेज झटके लगने लगे। सुबह का समय था और ज्यादातर यात्री सो रहे थे। अचानक विमान जोर से हिलने लगा और 2-3 मिनट तक पलटी खाता रहा।
यात्री के मुताबिक, 15-20 लोगों को ज्यादा चोटें आई हैं, जबकि 70 से 80% लोगों को मामूली चोट लगी हैं। यात्री के मुताबिक फ्लाइट में 100 से ज्यादा लोग सवार थे। घटना की जांच की जा रही है। फ्लाइट की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें उसकी सीलिंग के पैनल में दरारें दिखीं।
विमान की छत में दरारें…2 तस्वीरें…


आंख-गर्दन में चोटें, घायलों की 5 तस्वीरें

घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट से बाहर लाया गया।

एक एयर होस्टेस की गर्दन में चोट लगी। उसे गले में नेक ब्रेस पहनाया गया।

पैसेंजर को सिर में चोट लगी है। उसे स्ट्रैचर पर एयरपोर्ट से बाहर लाया गया।

चोट लगने के बाद पैसेंजर प्लेन में ही हाथ बांधे नजर आया।

घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया।
टर्बुलेंस में अचानक कई फीट नीचे आ सकता है विमान
टर्बुलेंस का मतलब है हवा का बहाव अचानक बदल जाना, जिससे विमान को झटके लगने लगते हैं। इस दौरान विमान कुछ समय के लिए ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिल सकता है और कभी-कभी कुछ फीट नीचे भी आ जाता है। इसी वजह से यात्रियों को लगता है कि विमान गिर रहा है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता।
टर्बुलेंस तीव्रता के लिहाज से तीन तरह के होते हैं
- हल्के टर्बुलेंस: इसमें प्लेन 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है। यात्रियों को पता भी नहीं चलता।
- मध्यम टर्बुलेंस: इसमें जहाज 3-6 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। इससे ड्रिंक गिर सकता है।
- गंभीर टर्बुलेंस: इसमें जहाज 30 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। सीट बेल्ट न लगाए रहने पर पैसेंजर उछलकर गिर सकते हैं।
क्या टर्बुलेंस की वजह से प्लेन क्रैश हो सकता है?
आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा सिस्टम की वजह से आज टर्बुलेंस से विमान हादसे की आशंका काफी कम हो गई है। हालांकि, बेहद गंभीर टर्बुलेंस या खराब मौसम में दुर्घटना का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
हालांकि, आज के आधुनिक विमान हर तरह के टर्बुलेंस को झेलने के हिसाब से बनाए जाते हैं। पायलटों को भी ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
दुनिया में टर्बुलेंस से जुड़े 3 बड़े विमान हादसे
- 1994 में अमेरिका की यूएस एयर फ्लाइट 1016 लैंडिंग के दौरान तूफान से पैदा हुए टर्बुलेंस की चपेट में आकर क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 37 लोगों की मौत हुई थी।
- 1999 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 1420 भी खराब मौसम और टर्बुलेंस के बाद रनवे से फिसलकर क्रैश हो गई थी, जिसमें 11 लोगों की जान गई।
- 2001 में अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 587 टेकऑफ के कुछ देर बाद वेक टर्बुलेंस की वजह से क्रैश हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार सभी 260 लोगों की मौत हो गई थी।













































