मंदसौर, 31 जुलाई गुरु एक्सप्रेस। जिले के अधिकांश क्षेत्रो में इस बार खरीफ सीजन किसानों के लिए मुसीबतों का मौसम बन गया है। कम बारिश ने फसलों की शुरुआत बिगाड़ दी तो इल्लियों के प्रकोप ने खड़ी फसल को संकट में डाल दिया। कई किसानों को दोबारा और तीसरी बार तक बुवाई करनी पड़ी है। वहीं, खराब गुणवत्ता के बीज, खाद की कमी और घोड़ारोज के झुंड फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि इस बार खेती में बढ़ी लागत आखिर निकलेगी कैसे?
हजारों का अतिरिक्त बोझ बढ़ा…
शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने सोयाबीन, मूंगफली सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी। लेकिन, लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कई खेतों में बीज अंकुरित ही नहीं हो पाए। मजबूरी में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी। कई स्थानों पर तीसरी बार तक बीज डालने पड़े, जिससे खेती की लागत में हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। बालागुड़ा के किसान पवन पाटीदार ने बताया कि पहली बार बोए गए बीज बारिश नहीं होने से खराब हो गए। इसके बाद दोबारा बुवाई करनी पड़ी। क्षेत्र के कई किसानों को तीसरी बार तक बुवाई करनी पड़ी है। बीज, मजदूरी और खेत तैयार करने का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
इल्लियों की परेशानी…
इधर, पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल पर इल्लियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। किसान रामचंद्र पोरवाल ने बताया कि तीन बीघा में लगी सोयाबीन की फसल को बचाने के लिए महंगे कीटनाशकों का छिडक़ाव कराया। लेकिन, अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बीज नहीं हुए अंकुरित…
खात्याखेड़ी के किसान छोटेलाल सैनी ने बताया कि मूंगफली के बीज अंकुरित नहीं हुए। शिकायत करने पर दुकानदार ने भी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। किसानों का कहना है कि खराब गुणवत्ता वाले बीजों के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हो रही। समय पर खाद नहीं मिलने से भी खेती प्रभावित हो रही है। किसान किशोर टेलर ने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। जबकि, किसानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
यहां घेड़ारोज कर रहे दुखी…
वहीं, घोड़ारोज किसानों के लिए बड़ी समस्या बन चुके हैं। 50 से 100 की संख्या में झुंड बनाकर ये जंगली जानवर खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को रौंद रहे हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही समय में बर्बाद हो रही है।
यह है किसानों के प्रमुख तनाव…
-कम बारिश से दोबारा और तीसरी बार तक करनी पड़ी बुवाई।
-सोयाबीन की फसल पर तेजी से बढ़ रहा इल्लियों का प्रकोप।
-खराब गुणवत्ता वाले बीजों की शिकायतें सामने आईं।
-समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से बढ़ी मुश्किल।
-घोड़ारोज के झुंड फसलों को पहुंचा रहे नुकसान।
-उत्पादन और लागत को लेकर किसानों में बढ़ी चिंता।





































