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Success Story: मप्र के यंग आर्किटेक्ट एवं ज्वेलर अंशुमान गुप्ता ने नई सोच से पाया मुकाम, यूथ के बने रोल मॉडल

Success Story Architect and Jewellers Anshuman Gupta: दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे, जो परिस्थितियों के अनुसार ढलकर आगे बढ़ते हैं, और दूसरे वे, जो अपनी सोच और मूल्यों के आधार पर अपना रास्ता खुद बनाते हैं। ग्वालियर के युवा आर्किटेक्ट एवं ज्वेलर अंशुमान गुप्ता इसी दूसरी श्रेणी में आते हैं। उनके लिए काम का मूल उद्देश्य केवल सफलता पाना नहीं, बल्कि खुशियां बांटना है- चाहे वह किसी परिवार का सपनों का घर हो या जीवन के किसी खास अवसर से जुड़ा आभूषण। इसी सोच के साथ उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी अलग पहचान स्थापित की है। आर्किटेक्चर अंशुमान के लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि संस्कार, जिम्मेदारी और खुशियां बांटने का माध्यम है। उनके पिता आशीष गुप्ता, जो ग्वालियर के प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट माने जाते हैं, के साथ काम करते हुए उन्होंने न केवल डिजाइन और प्लानिंग की बारीकियां सीखीं, बल्कि यह भी समझा कि एक घर लोगों के जीवन में स्थायित्व और सुख का आधार होता है। वहीं उनकी मां सीमा गुप्ता से उन्हें धैर्य, संतुलन और हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच बनाए रखने की सीख मिली।

करियर की शुरुआत में पारिवारिक मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ते हुए अंशुमान ने ईमानदारी, अनुशासन और क्लाइंट के प्रति जवाबदेही जैसे मूल्यों को आत्मसात किया। वे मानते हैं कि आर्किटेक्चर में असली सफलता केवल सुंदर इमारतें खड़ी करने में नहीं, बल्कि ऐसे स्थान रचने में है, जहाँ लोग सुकून, सुरक्षा और खुशियाँ महसूस करें। पूर्व वर्ष अंशुमान के लिए आर्किटेक्चर के क्षेत्र में खास रहे। इस दौरान उन्होंने कई रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिनमें नई प्लानिंग और सस्टेनेबल आर्किटेक्चर का विशेष ध्यान रखा गया। उनके अनुसार घर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि परिवार के सपनों, भावनाओं और भविष्य की आशाओं का प्रतिबिंब होता है। इसी सोच के साथ वे हर प्रोजेक्ट को केवल डिजाइन नहीं, बल्कि अपने क्लाइंट की खुशियों से जुड़ी एक जिम्मेदारी मानकर आकार देते हैं।

एमपी का दूसरा किसान आउटलेट लेकर आए ग्वालियर में अंशुमान गुप्ता

अंशुमान गुप्ता ने अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2024 में उन्होंने ग्वालियर के डीबी मॉल में प्रतिष्ठित ‘किसना डायमंड एंड गोल्ड ज्वेलरी’ के एक्सक्लूसिव कंपनी आउटलेट की शुरुआत की। इस नए कदम के लिए उन्हें परिवार का पूरा समर्थन मिला, विशेष रूप से भाभी डिंपी गुप्ता द्वारा मिले प्रोत्साहन ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। यह मध्यप्रदेश का दूसरा एक्सक्लूसिव किसना स्टोर है। कम समय में ही इस आउटलेट की ग्राहकों से बेहतरीन प्रतिसाद मिला, जिसका मुख्य कारण उत्कृष्ट कस्टमर सर्विस और विश्वास पर आधारित कार्यशैली रही। ग्राहकों के साथ इस जुड़ाव की और मजबूत करने के लिए इस वर्ष दो बार कार लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें दो ग्राहकों ने नई कार जीती। व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी आंशुमान की सोच का अहम हिस्सा है। वर्ष भर उन्होंने अपनी टीम के साथ वृक्षारोपण, भोजन वितरण और रक्तदान शिविर जैसी सामाजिक नतिविधियों का सक्रिय रूप से संचालन किया। वे मानते हैं कि समाज से मिली सफलता का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका कुछ हिस्सा समाज को लौटाया जाए। आर्किटेक्चर और ज्वेलरी, दोनों क्षेत्रों में अंशुमान गुप्ता की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि सीच स्पष्ट हो, मूल्य मजबूत हीं और काम के प्रति ईमानदारी हो, तो छोटे शहरों से निकलकर भी बड़ी और स्थायी पहचान बनाई जा सकती है।

आर्किटेक्चर के साथ ज्वेलरी में भी अंशुमान ने बनाई अपनी पहचान

आर्किटेक्चर के समानांतर, अंशुमान ने ज्वेलरी व्यवसाय में भी अपनी स्पष्ट सोच के साथ कदम रखा। वर्ष 2018 में उन्होंने अपने भाई आशुतोष गुप्ता के नेतृत्त्व में नित्यानंद ज्वेलर्स की स्थापना की। इसका उद्देश्य केवल आभूषणों का व्यापार करना नहीं था, बल्कि ग्राहकों को पारदर्शिता, शुद्धता और सम्मान पर आधारित अनुभव देना था। उनकी यह कार्यशैली ही नित्यानंद ज्वेलर्स की पहचान बनी और कम समय में यह ग्वालियर के विश्वसनीय ज्वेलरी ब्रांड्स में गिना जाने लगा। अंशुमान गुप्ता अपने जीवन का मूल सिद्धांत “खुशियाँ बाँटना” मानते हैं। वे कहते हैं कि ज्वेलरी हमेशा किसी खास अवसर से जुड़ी होती है, शादी, जन्मदिन, सालगिरह, पदोन्नति या किसी उपलब्धि का उत्सव। ऐसे क्षणों में ग्राहक केवल आभूषण नहीं, बल्कि भावनाओं और भरोसे की तलाश करता है। इसी भावना के साथ वे हर ग्राहक के अनुभव को खास बनाने का प्रयास करते हैं।

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