मंदसौर में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ सड़कों पर उतरे शहरवासी:300 रुपए का बिल पहुंचा 3000 तक, बढ़ी रीडिंग की जांच की मांग

मंदसौर शहर में लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटरों के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में नागरिक बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जोरदार प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने कार्यपालन अभियंता एवं मुख्य जिला अधिकारी, विद्युत वितरण कंपनी के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनकी जांच कराने और बढ़े हुए बिजली बिलों में राहत देने की मांग की।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि शहर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जिन परिवारों का बिजली बिल पहले 300 से 500 रुपए तक आता था, उनका बिल अब 2500 से 3000 रुपए तक पहुंच रहा है। वहीं कई घरों में 5 हजार से 15 हजार रुपए तक के बिल आने लगे हैं, जबकि बिजली की खपत और उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ है।
बंद घरों में भी चल रहे मीटर, जताया संदेह प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई मामलों में घरों में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं होने या सभी विद्युत उपकरण बंद होने के बावजूद स्मार्ट मीटर लगातार रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में मीटरों की तकनीकी सटीकता को लेकर संदेह पैदा हो गया है। लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
आमजनों ने आरोप लगाया कि उनकी सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। साथ ही बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटरों के कारण बढ़े हुए बिलों ने आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। महंगाई के दौर में यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए असहनीय बनती जा रही है।
अघोषित बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी शहर में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भारी-भरकम बिल वसूलने के बावजूद घंटों बिजली गुल रहने से आम नागरिक, व्यापारी, छोटे उद्योग, बच्चे, बुजुर्ग और मरीज परेशान हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि किसी तकनीकी या रखरखाव कार्य के लिए बिजली बंद करनी हो तो उसकी पूर्व सूचना जनता को दी जाए।
शहरवासियों ने प्रशासन के समक्ष जो मांगें रखीं उनमें, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाना, बढ़े हुए बिजली बिलों की पुनः जांच कर त्रुटियों का सुधार करना, अघोषित बिजली कटौती बंद कर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना, जांच पूरी होने तक उपभोक्ताओं को बिल भुगतान में अस्थायी राहत देना, किसी का कनेक्शन न काटे जाने की मांग और स्मार्ट मीटर लगने के बाद बढ़ी यूनिट खपत की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच शामिल हैं।
अधिकारियों ने जांच का दिया आश्वासन प्रदर्शन में शामिल लक्ष्मी सूर्यवंशी ने बताया कि उनके घर का बिजली बिल पहले 500 से 600 रुपए के बीच आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद यह बढ़कर 6 से 7 हजार रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने पुराने मीटर पुनः लगाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो महिलाएं सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगी।
जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने बताया कि नागरिकों की शिकायतों को अधिकारियों के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि स्मार्ट मीटरों और बिजली बिलों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक उपभोक्ताओं को फिलहाल बिजली बिल जमा नहीं करने की सलाह दी गई है।


































