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जनता पर महंगाई की मार… साबुन, सर्फ और बिस्किट होंगे महंगे, इन कंपनियों ने दिए संकेत

आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन जेब पर भारी पड़ सकते हैं। साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों की कीमतों में जल्द ही इजाफा होने वाला है। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट (लागत) के कारण अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। तिमाही नतीजों के बाद कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि मुनाफे को बचाने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी अब अपरिहार्य हो गई है।
दाम बढ़ने के मुख्य कारण
कंपनियों के अनुसार, वैश्विक और स्थानीय स्तर पर कई ऐसे कारक हैं जिन्होंने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है…
- सप्लाई चेन पर असर: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) का खर्च बढ़ गया है।
- कमजोर रुपया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी आयातित सामान को महंगा कर दिया है।
- कच्चा माल और पैकेजिंग: ईंधन, एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट्स की कीमतों में 20% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
कंपनियों की रणनीति: ‘छोटा पैकेट’ और ‘कम डिस्काउंट’
कीमतों में सीधे बढ़ोतरी के साथ-साथ कंपनियां कुछ अन्य तरीके भी अपना रही हैं…
- ग्रामेज में कटौती: ₹5, ₹10 और ₹15 वाले लोकप्रिय पैक की कीमत वही रखने के लिए कंपनियां उनके वजन (मात्रा) में कमी कर रही हैं।
- प्रमोशन में कमी: लागत घटाने के लिए विज्ञापनों, छूट (Discounts) और स्कीमों पर होने वाले खर्च में कटौती की जा रही है।
- सप्लाई चेन में सुधार: स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन को अधिक कुशल बनाकर खर्च कम करने की कोशिश जारी है।
प्रमुख कंपनियों का पक्ष
- डाबर इंडिया: ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा के मुताबिक, कंपनी करीब 10% महंगाई का सामना कर रही है और विभिन्न सेगमेंट्स में औसतन 4% तक दाम बढ़ा चुकी है।
- ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज: एमडी-सीईओ रक्षित हरगेव ने बताया कि ईंधन और पैकेजिंग खर्च बढ़ने से गुड डे, टाइगर और मिल्क बिकीज जैसे ब्रांड्स के बड़े पैक महंगे होंगे।
- हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL): सीएफओ निरंजन गुप्ता के अनुसार, कंपनी पर 8-10% महंगाई का बोझ है। सर्फ एक्सेल, लाइफबॉय और डव जैसे ब्रांड्स के दाम पोर्टफोलियो के आधार पर 2 से 5% तक बढ़ाए गए हैं।


























