मंदसौर में मानसून सक्रिय, 48 घंटे में 3.38 इंच बारिश:शिवना का जलस्तर बढ़ा, नदी-नाले उफान पर, नाहरगढ़-बिल्लोद मार्ग बंद

मंदसौर जिले में सुस्त पड़ा मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। सोमवार से शुरू हुआ बारिश का दौर बुधवार को भी जारी रहा। मंदसौर शहर समेत जिले के अधिकांश हिस्सों में हल्की से तेज बारिश हुई। लगातार बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी, वहीं तापमान गिरने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली।
पिछले 24 घंटे में जिले में 1.82 इंच बारिश दर्ज की गई है। वहीं बीते 48 घंटे में कुल 3.38 इंच वर्षा हुई। मंदसौर के अलावा दलौदा, अफजलपुर, सीतामऊ, नाहरगढ़, भानपुरा, गरोठ, सुवासरा, शामगढ़, मल्हारगढ़, पिपलियामंडी, नारायणगढ़, डिगांव और बरखेड़ा समेत अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी है।
इस मानसूनी सीजन में जिले में अब तक 19.18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि तक 19.76 इंच बारिश हुई थी। इस लिहाज से इस साल अब तक 0.58 इंच कम बारिश दर्ज हुई है।

कलाभाटा डैम के गेट खोले, पशुपतिनाथ मंदिर की पुलिया डूबी
लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कलाभाटा डैम में पानी की आवक बढ़ने के बाद मंगलवार को दो छोटे गेट करीब तीन-तीन फीट खोले गए थे। बुधवार को भी एक गेट करीब तीन फीट तक खोला गया।
डैम से पानी की आवक बढ़ने के कारण पशुपतिनाथ मंदिर की छोटी पुलिया जलमग्न हो गई। एहतियात के तौर पर पुलिया से आवागमन बंद कर दिया गया है। पुलिसकर्मी मौके पर तैनात हैं और लोगों को पुलिया पार करने से रोक रहे हैं।

नाहरगढ़-बिल्लोद मार्ग पर भी पुलिया डूबी
लगातार बारिश के कारण नाहरगढ़-बिल्लोद मार्ग पर शिवना नदी की पुलिया पर भी पानी आ गया है। इसके बाद यहां यातायात रोक दिया गया। नाहरगढ़ पुलिस मौके पर तैनात है और पुलिया के दोनों ओर लोगों को पानी के बीच से निकलने से रोक रही है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पानी का बहाव कम होने तक किसी भी पुलिया को पार करने का प्रयास न करें। आवागमन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों का ही इस्तेमाल करें।
12 से 15 अगस्त तक ज्यादा सक्रिय रहेगा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार 12 से 15 अगस्त के बीच मंदसौर जिले में बारिश की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। इस दौरान कई इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। 16 अगस्त के बाद बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आने का अनुमान है, हालांकि मानसून की गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी।







































