कारोबारी के घर घुसा 6 फीट लंबा मगरमच्छ:सीढ़ियों पर देख एक घंटे तक परिवार दहशत में रहा; वन अमले ने शिवना नदी में छोड़ा

मंदसौर जिले के नारायणगढ़ में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विशाल मगरमच्छ रिहाइशी इलाके में घुस आया। देखते ही देखते यह मगरमच्छ टेंट व्यवसायी शैलेंद्र पाटीदार के घर की सीढ़ियों तक जा पहुंचा। गनीमत यह रही कि समय रहते मगरमच्छ पर नजर पड़ गई, जिससे कोई अनहोनी नहीं हुई।
परिवार की नजर जब मगरमच्छ पर पड़ी तो सभी के होश उड़ गए। तुरंत शोर मचाया। आवाज सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हो गए। आशंका जताई जा रही है कि शैलेंद्र पाटीदार के घर के पास स्थित नाले में लगातार जलभराव होने के कारण मगरमच्छ नाले से भटक कर आबादी वाले क्षेत्र में आ गया। घटना रविवार सुबह 7.30 बजे की है।
देखिए तस्वीरें

मगरमच्छ टेंट व्यवसायी शैलेंद्र पाटीदार के घर की सीढ़ियों पर बैठा था।
एक घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ा
ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत घटना की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर सुनील जैन और वनरक्षक मयूर चौहान के नेतृत्व में वन विभाग की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों के सहयोग से वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया गया।
5 से 6 फीट लंबा, 10 से 12 किलो वजनी था
जिला वन अधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है। उसे मुंदड़ी गांव के पास शिवना नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वनरक्षक मयूर सिंह चौहान ने बताया कि मगरमच्छ करीब 5 से 6 फीट लंबा और 10 से 12 किलो वजनी था।

वन विभाग ने मगरमच्छ को शिवना नदी में छोड़ दिया।
इस तरह किया जाता है रेस्क्यू
वन रक्षक के मुताबिक, बताया कि मगरमच्छ का रेस्क्यू पूरी सावधानी और ट्रेंड टीम की मदद से किया जाता है। सबसे पहले टीम मगरमच्छ को चारों ओर से घेरती है। इसके बाद विशेष स्टिक की मदद से उसकी गर्दन को कंट्रोल किया जाता है, ताकि वह हमला न कर सके।
फिर उसके मुंह को मजबूत रस्सी से बांधा जाता है और शरीर को कंट्रोल कर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू वाहन में रखा जाता है। इसके बाद उसे नदी या बड़े तालाब में छोड़ दिया जाता है। जिला फॉरेस्ट अधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि मल्हारगढ़, नारायणगढ़ और नाहरगढ़ क्षेत्र में नदी और उससे जुड़े कई नाले हैं।
बारिश के मौसम में मगरमच्छ पानी के बहाव के साथ रिहाइशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाती है।



































