मंदसौर

धड़ल्ले से ओवरलोड स्कूली वाहन उड़ा रहे नियमों की धज्जियां

औपचारिकता… पता है यहां कुछ नहीं मिलेगा ?

मंदसौर, 30 जुलाई गुरु एक्सप्रेस। परिवहन विभाग के नियम, निर्देश और कोर्ट के आदेश… मंदसौर में सभी को ताक पर रखा जा रहा है। स्कूली वाहनों की जांच के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। बड़े नामी स्कूलों की बसों की जांच कर खानापूर्ति की जा रही है। जबकि, मोटी फीस वसूलने वाले इन स्कूलों के वाहन वैसे ही ऑल इज वेल है। जबकि, तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों से भरे ओवरलोड स्कूल वाहनों के साथ ऑटो परिवहन विभाग को नजर नहीं आ रहे।  2019 में परिवहन विभाग के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने स्कूल वाहनों के संबंध में कई नियम तैयार कर कार्रवाई के लिए निर्देश भी जारी किए। लेकिन, परिवहन विभाग की नींद नहीं खुली। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस संबंध में गाइड लाइन जारी की। इस गाइड लाइन का पालन करवाने के लिए भी परिवहन विभाग हो या यातायात पुलिस, हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। स्कूलों की तरफ से चलने वाले वाहनों में भी स्पीड गर्वनर सहित कई कमियां गाइड लाइन के हिसाब से है। लेकिन, निजी वाहन विशेषकर ऑटो रिक्शा तो नियमों का ही उल्लंघन नहीं कर रहे बल्कि बच्चों की जान से खिलवाड़ करते सुबह-सुबह नजर आ रहे हैं।

स्कूलों में संचालित होने वाले वाहनों के लिए परिवहन विभाग ने नियम-कायदे बना रखे हैं। कुछ समय पहले हाईकोर्ट ने भी गाइड लाइन जारी की है। इसके मुताबिक एक ऑटो में 3 से ज्यादा बच्चे नहीं बैठ पाएंगे। इसके अलावा स्कूल में 12 साल से अधिक पुराने वाहनों का संचालन नहीं होगा। लेकिन, शहर की सड़को पर नियम विरुद्ध वाहन दौड़ रहे हैं। ऑटो ड्राइवर मनमानी से स्कूली बच्चों को ऑटो में ठूंस-ठूंसकर बैठा रहे हैं। मामले में ना स्कूल प्रबंधन ध्यान दे रहा ना ही प्रशासन। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार स्कूल में चलने वाले वाहनों का फिटनेस सहित अन्य जरुरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि सभी नियम-कायदों की पालना हो सके। स्कूलों में परिवहन विभाग के नियमों के विपरीत वाहन दौड़ रहे हैं। यहां तक कि कई स्कूलों में प्राइवेट वाहन संचालित हो रहे हैं। इनमें ऑटो रिक्शा भी शामिल हैं। जिनमें क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। स्थिति यह है कि ऑटो की ड्राइवर सीट पर भी बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा है।

कई स्कूल हाइवे और मुख्य सड़क के किनारे…

शहर के चारों ओर निजी स्कूल हैं। हर दिशा में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ऑटो ड्राइवर स्कूल पहुंचा रहे  हैं। इनमें से कुछ स्कूल हाइवे किनारे तथा मुख्य सड़क किनारे हैं। शहर के रेवास देवड़ा मार्ग पर, कैलाश मार्ग रोड, संजीत रोड स्थित कई स्कूलों के लिए बच्चों को ऑटो की ड्राइवर सीट पर लटककर स्कूल जाते देखा जा सकता है। यहां भी बेतरतीब तरीके से ऑटो में बैठाकर बच्चों को पहुंचाया जाता है।

माता-पिता भी इसके लिए जिम्मेदार…

ओवरलोड स्कूली वाहन यातायात तथा परिवहन नियमों को ताक पर रखकर बेखौफ दौड़ रहे हैं। इसके लिए प्रशासन के साथ ही बच्चों के माता-पिता भी जिम्मेदार हैं। ऑटो को हायर करते समय माता-पिता भी यह बात नहीं करते हैं कि ऑटो में बच्चों की संख्या कम ही रखे। ऑटो चालक ज्यादा बच्चे होने पर महीने की फीस कम करने की बात करते हैं और इस चक्कर में माता-पिता भी मान जाते हैं। कछ अभिभावक सस्ते परिवहन के लालच में बच्चों को ओवरलोड ऑटो में भेज रहे हैं। जबकि, अभिभावक यह जानने की कोशिश नहीं करते कि जिस ऑटो में उनका बच्चा स्कूल आता-जाता है, उसमें नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

यह है कोर्ट की गाइड लाइन…

स्कूल बस को पीले रंग से रंगा जाएगा और वाहन के आगे और पीछे स्कूल बस या आन स्कूल ड्यूटी लिखवाना होगा। स्कूल बस के बाहर दोनों तरफ स्कूल के वाहन प्रभारी का नाम, पता एवं टेलीफोन, मोबाइल नंबर लिखा होगा।

स्कूल बसों की खिड़कियों के शीशों पर रंगीन फिल्म नहीं लगेंगी।

प्रत्येक स्कूल बस में फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र होगा।

प्रत्येक स्कूल बस में आपात स्थिति से निपटने में प्रशिक्षित एक परिचारक होगा।

ड्राइवर के पास स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस और पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। ऐसे ड्राइवर जिन्होंने एक वर्ष में दो से ज्यादा बार सिग्नल जंप किया है, वे स्कूल बस नहीं चला सकेंगे। जिस व्यक्ति का तेज गति से या शराब पीकर गाड़ी चलाने का एक बार भी चालान बना है वह भी स्कूल बस नहीं चला सकेगा। स्कूल प्रबंधन इस संबंध में ड्राइवर से शपथ पत्र लेगा।

प्रत्येक स्कूल बस में सीट के नीचे स्कूल बैग रखने की जगह होगी।

प्रत्येक बस में स्पीड गवर्नर लगा होगा।

स्कूल बस में दाहिनी ओर एक आपातकालीन दरवाजा और गुणवत्ता वाला लाकिंग सिस्टम होगा।

प्रेशर हार्न नहीं लगाया जाएगा। रात में स्कूल बसों के अंदर नीले बल्ब लगाना होंगे।

कोई भी स्कूल बस 12 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होगी।

छात्रों को लाने-ले जाने में लगे आटो में चालक सहित चार से अधिक व्यक्ति नहीं बैठ सकते हैं।

प्रत्येक स्कूल बस में एक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और एक सीसीटीवी कैमरा होगा। अभिभावक वाहन को मोबाइल एप के माध्यम से ट्रैक और देख सकेंगे।

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