एमपी में बिजली हुई महंगी… उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा 10% तक अतिरिक्त भार, सरचार्ज और टैरिफ में बढ़ोतरी

मध्य प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में कम उत्पादन का असर अब सीधे बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले छह माह में प्रदेश के ताप विद्युत गृहों का प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) करीब 70 प्रतिशत रहा, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 76.12 प्रतिशत दर्ज हुआ। यानी मध्य प्रदेश के बिजली घरों का क्षमता उपयोग छत्तीसगढ़ से 6.12 प्रतिशत कम रहा।
कम उत्पादन से बढ़ी बाहर से बिजली खरीदने की मजबूरी
अपने बिजली घरों से कम उत्पादन होने पर प्रदेश की मांग पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है। बाहर से खरीदी गई बिजली की लागत बढ़ने पर उसका असर बिजली की कुल लागत में जुड़ता है और नियामकीय व्यवस्था के तहत इसका एक हिस्सा ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में उपभोक्ताओं के बिल तक पहुंचता है।
मार्च में एफपीपीएस माइनस 0.63 प्रतिशत था, जो सितंबर में बढ़कर 5.063 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा एक अप्रैल 2026 से बिजली दरों में करीब चार प्रतिशत की वृद्धि लागू है। इस तरह टैरिफ वृद्धि और एफपीपीएस को मिलाकर उपभोक्ताओं पर बिजली की लागत में करीब 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार का असर दिखाई दे रहा है।
छह प्रतिशत कम पीएलएफ से 600 करोड़ का वित्तीय नुकसान
मध्य प्रदेश में ताप विद्युत की कुल स्थापित क्षमता करीब 4570 मेगावाट है। उपलब्ध आकलन के अनुसार पीएलएफ में एक प्रतिशत के अंतर से करीब 20 करोड़ यूनिट उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस आधार पर 6.12 प्रतिशत के अंतर से करीब 120 करोड़ यूनिट का संभावित उत्पादन अंतर बैठता है।
यह वास्तविक कम उत्पादन का आंकड़ा नहीं है। वास्तविक अंतर के लिए प्रत्येक संयंत्र की उपलब्धता, तकनीकी खराबी और बंद रहने की अवधि समेत अन्य परिस्थितियों का आकलन जरूरी होगा। फिर भी इससे क्षमता उपयोग में अंतर के प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस मामले में बिजली मामलों के जानकार अतिरिक्त मुख्य अभियंता और एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कंपनी की कार्यप्रणाली में दखल की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले छह माह का संयंत्र उत्पादकता गुणांक (पीएलएफ) मप्र का सिर्फ 70 प्रतिशत रहा जबकि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में पीएलएफ 76 प्रतिशत था।
6 प्रतिशत की इस कमी की वजह से छह माह में 120 करोड़ यूनिट बिजली का कम उत्पादन हुआ है। औसत पांच रुपये की दर से भी बिजली का दाम जोड़ा जाए तो करीब 600 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
छह माह में 14,042.93 मिलियन यूनिट उत्पादन
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार 30 सितंबर तक मध्य प्रदेश के ताप विद्युत गृहों से 14,042.93 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
| ताप विद्युत गृह | क्षमता (मेगावाट) | उत्पादन (मिलियन यूनिट) |
| अमरकंटक | 210 MW | 636.53 MU |
| संजय गांधी, बिरसिंहपुर | 1340 MW | 4286.204 MU |
| सतपुड़ा | 500 MW | 1720.93 MU |
| सिंगाजी | 2520 MW | 7399.50 MU |
| कुल | 4570 MW | 14,042.93 MU |
छत्तीसगढ़ में संबंधित ताप विद्युत क्षमता करीब 2840 मेगावाट है। वहां छह माह में 9294.70 मिलियन यूनिट उत्पादन और 76.12 प्रतिशत पीएलएफ दर्ज हुआ। दोनों राज्यों की कुल क्षमता अलग होने के कारण उत्पादन की सीधी तुलना के बजाय पीएलएफ अधिक महत्वपूर्ण है।











































