
दुनिया भर के आर्थिक संकट और देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का सर्वसम्मत ऐलान किया है.
इस फैसले का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा. देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों से मिलने वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें अब बढ़ जाएंगी, जिससे लोगों की मासिक किस्त (ईएमआई) महंगी होना तय है. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी है.
क्यों बढ़ाना पड़ा रेपो रेट, ये हैं 3 मुख्य कारण
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती चुनौतियों के कारण यह एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था-
कच्चा तेल $100 के पार: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे भारत में महंगाई का खतरा बढ़ गया है.
बढ़ती खुदरा महंगाई: देश में खुदरा महंगाई (सीपीआई) जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से काफी ऊपर है.
मौसम की मार: अल नीनो के असर और कम बारिश की आशंका के चलते रबी फसलों के उत्पादन पर जोखिम मंडरा रहा है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.
एसबीआई रिसर्च ने फैसले को बताया जरूरी
एसबीआई रिसर्च के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट और बाजार के बिगड़ते हालातों को देखते हुए आरबीआई का यह फैसला बिल्कुल सही समय पर आया है. केंद्रीय बैंक के लिए बाद में पछताने से बेहतर था कि वह समय रहते यह कड़ा कदम उठा ले. आरबीआई ने रेपो रेट के साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) को 5.25 प्रतिशत और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत पर एडजस्ट किया है. जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले समय में महंगाई कम नहीं हुई, तो अगली बैठकों में ब्याज दरें और भी बढ़ाई जा सकती हैं.











































