Ratlam Railway Mandal: ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम में चलेंगी अब रतलाम रेलवे मंडल की गाड़ियां, दिल्ली-मुंबई रेलवे रूट में 1227 किमी को मिला ‘कवच’

Ratlam Railway Mandal: रतलाम रेलवे मंडल की गाड़ियां अब आपको ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटक्शन सिस्टम में चलती हुई दिखाई देंगी। 2026 में भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण दिल्ली-मुंबई रूट पर रेलगाड़ियां ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम यानी कवच सुरक्षा में दौड़ने लगेगी। यह सिस्टम एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ रही ट्रेनों का पता लगाकर ऑटोमेटिक ब्रेक लगा देगा।
चार साल से लगातार चल रही वर्किंग में रेलवे ने 1387 किमी लंबे दिल्ली-मुंबई रूट में से 1227 में कवच सुरक्षा प्रणाली लागू कर दी है। इसमें दिल्ली से नागदा तक का 667 किमी, नागदा से गोधरा तक का 224 किमी और गोधरा से विरार तक का 336 किमी सेक्शन शामिल है। अब सिर्फ 160 किमी रेल लाइन बाकी रह गई है। इसमें रतलाम मंडल का 78 किमी लंबा मंगल महुड़ी से पंचपिपलिया स्टेशन तक, मुंबई मंडल का विरार से मुंबई सेंट्रल तक का 55 किमी और दिल्ली से मथुरा तक का लगभग 27 किमी का हिस्सा बाकी रह गया है। इसमें भी सिस्टम के उपकरण तेजी से लगाए जा रहे हैं। इसी रफ्तार से वर्किंग चलती रही तो साल अंत तक पूरे राजधानी रूट कवच सुरक्षा प्रणाली की कमीशनिंग हो जाएगी
नागदा-गोधरा कक्च सुरक्षा वाला मंडल का पहला रेलखंड
सोमवार को रतलाम मंडल के नागदा-गोधरा सेक्शन में कवच प्रणाली लागू की गई। इसके लिए कवच’ सिस्टम से लैस लोकोमोटिव को डीआरएम अश्वनी कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस इंजन ने 224 रूट किमी का सफर किया। इसमें 154 किलोमीटर हिस्सा रतलाम मंडल का था, जिसमें गोधरा से मंगल महुड़ी और पंच पिपलिया से नागदा खंड शामिल है। वहीं 70 किलोमीटर वडोदरा मंडल का रहा। जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार
के अनुसार कमीशनिंग से पहले कवच प्रणाली का फील्ड ट्रायल्स किए गए। सिस्टम के तहत 40 मीटर ऊंचे 41 लैटिस टॉवर, 39 स्टेशन कवच यूनिट्स, 606 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल, 6000 आरएफआईडी टैग्स और 90 लोकोमोटिव में कवच यूनिट्स लगाई गई। इनमें से रतलाम मंडल में 28 टॉवर, 27 स्टेशन यूनिट्स, 310 किमी ऑप्टिकल फाइबर और 4000 आरएफआईडी टैग्स शामिल है।


















































