डाक विभाग ने 8 लोगों को नौकरी से निकाला, जांच में फर्जी निकले दस्तावेज, सीबीआई ने शुरू की जांच

ग्रामीण डाक सेवक में फर्जी 10वीं की मार्कशीट लगाकर नौकरी पाने वाले आठ अभ्यर्थियों को डाक विभाग ने नौकरी से निकाल दिया है. जनवरी 2023 और जुलाई 2024 की भर्ती में इन्हीं अंकसूचियों के आधार पर चयन हुआ था.
जांच में मार्कशीट फर्जी मिलने के बाद मामला सीबीआई तक पहुंचा. 18 सितंबर की शिकायत पर 22 सितंबर को आठ अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. जांच में चार राज्यों के बोर्ड के नाम पर फर्जी मार्कशीट और करीब एक हजार रुपए में इन्हें उपलब्ध कराने की बात सामने आई है.
चार राज्यों के बोर्ड के नाम पर फर्जी मार्कशीट-
जांच में सामने आया कि अंकसूचियां बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम से तैयार की गई थीं. फर्जी अंकसूचियां करीब एक हजार रुपए में उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है. सीबीआई को आशंका है कि फर्जी अंकसूचियां तैयार करने वाले गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है.
जबलपुर-कटनी में मिली थी पोस्टिंग-
फर्जी दस्तावेज के आधार पर चयनित आठों अभ्यर्थियों को जबलपुर और कटनी के अलग-अलग उप डाकघरों में पदस्थ किया गया था. मानवेंद्र सिंह को कुंडम, राजा बाबू अहिरवार और सौरभ शर्मा को पाटन, प्रदीप खरे को कुड़ारी-उमरिया बरेला और नयन कुमार को रमखिरिया-शहपुरा में पोस्टिंग मिली थी. बद्री प्रसाद यादव को कटनी के संसारपुर, देवेंद्र सिंह चौहान को उमरिया पान और रमाकांत शर्मा को मोहतरा उप डाकघर में पदस्थ किया गया था.
सीबीआई जांच में गिरोह व सरकारी कर्मचारियों की भूमिका-
सीबीआई फर्जी अंकसूचियां तैयार करने वाले नेटवर्क का पता लगा रही है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दस्तावेज किन माध्यमों से तैयार कराए गए और भर्ती प्रक्रिया में इनके इस्तेमाल के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं. शिकायत में सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है. सीबीआई अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है. आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.












































