मंदसौर जिले में 28 लाख से खड़ा किया कारोबार, साउथ तक महक रहा हमारा लहसुन

Mandsaur News: प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत पिपलिया मंडी में लहसुन प्रोसेसिंग का सफल मॉडल सामने आया है। पिपलिया मंडी में संचालित यूनिट में रोज करीब 1 टन गार्लिक पेस्ट तैयार किया जा रहा है। यहां लहसुन की ग्रेडिंग, फीलिंग और पेस्टिंग का काम आधुनिक मशीनों से होता है। तैयार गार्लिक पेस्ट और अन्य उत्पाद उत्तर प्रदेश, बिहार, बेंगलुरु, तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में भेजे जा रहे हैं। इस यूनिट से 25 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है।
पिपलिया मंडी निवासी दीपक कुमार माहेश्वरी पहले छोटे स्तर पर लहसुन का व्यापार करते थे। उनका सपना इस कारोबार को बड़े स्तर पर स्थापित करने का था, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी बाधा बनी हुई थी। माहेश्वरी ने बताया कि उद्यानिकी विभाग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया। सेंट्रल बैंक पिपलिया मंडी से लगभग 28 लाख 43 हजार रुपए का ऋण मिला। इस पर 10 लाख रुपए की सब्सिडी भी मिली। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक मशीनों के साथ लहसुन प्रसंस्करण यूनिट शुरू की।
यूनिट में ग्रेडिंग मशीन और बल्क ब्रेकर मशीन लगाई गई हैं। ग्रेडिंग मशीन से लहसुन की छोटी-बड़ी कलियों को अलग किया जाता है। इससे गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग ग्रेड तैयार होते हैं। बल्क ब्रेकर मशीन के माध्यम से लहसुन की कलियों को साफ किया जाता है। इसके अलावा यहां गार्लिक ग्रेडिंग, पीलिंग, पेस्टिंग और अन्य उत्पादों का निर्माण भी किया जाता है। मशीनों से लहसुन की कलियों को पीसकर गार्लिक पेस्ट तैयार किया जाता है।
हमारे लहसुन की गुणवत्ता देश में प्रसिद्ध
दीपक का कहना है कि मंदसौर की लहसुन की गुणवत्ता पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां की लहसुन की मांग कई राज्यों में रहती है। लहसुन की लगभग हर चीज उपयोगी होती है। प्रसंस्करण के बाद बचने वाले अवशेषों को वे गौशालाओं में भेजते हैं, जहां इसका उपयोग गायों के चारे के रूप में किया जाता है। माहेश्वरी का कहना है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना से उन्हें बड़ा सहारा मिला। सही योजना और मेहनत के दम पर छोटा व्यवसाय भी बड़े उद्योग का रूप ले सकता है।
10 सालों से इस उद्यम से जुड़े हैं दीपक माहेश्वरी बताते हैं कि उनकी यूनिट में रोज
करीब 1 टन गार्लिक पेस्ट का उत्पादन हो रहा है। ग्रेडिंग के बाद निकलने वाला बड़े आकार का लहसुन सीधे दक्षिण भारत के बाजारों में भेजा जाता है। इससे अच्छा लाभ मिलता है। दीपक पिछले करीब 10 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं।








