मंदसौर

UPSC Exam 2025: मंदसौर जिले के नितिन मोदी और अंकुश पाटीदार ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पाई सफलता, कड़ी मेहनत से लहराया परचम

UPSC Success Story From Mandsaur District: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में मंदसौर जिले के नितिन ने 751वीं तो अंकुश ने 780वीं रैंक हासिल की है। इस परिक्षा का परिणाम शुक्रवार को जारी हुआ। जिले के दो होनहारों ने यूपीएससी मैं अपना दमखम दिखाया है। इनमें गरोठ क्षेत्र के नितिन मोदी 751वीं रैंक लाए हैं, तो वहीं शामगढ़ क्षेत्र के नारिया के रहने वाले अंकुश पाटीदार ने 780वीं रैंक हासिल की है। दोनों ही युवा जिले के उन कई युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो लगातार मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाना चाहते हैं।

पूरे फोकस और सही मार्गदर्शन के साथ तैयारी करें तो सफलता मिलेगी: नितिन

गरोठ शहर के नितिन मोदी ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी-2025 में तीसरे प्रयास में 751वीं रैंक हासिल की। आईआईटी धनबाद से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने वाले नितिन ने लाखों के पैकेज वाली निजी नौकरी का रास्ता छोड़कर सिविल सेवा का लक्ष्य चुना। उन्होंने 2023 में पहली बार मेन्स परीक्षा दी और 2024 में इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन कम अंक मिलने से चयन नहीं हो पाया। इसके बाद 2025 में घर पर ही तैयारी जारी रखी और अंततः सफलता हासिल की। नितिन शहर के तीसरे युवा हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग के बाद यूपीएससी में सफलता पाई है।

इससे पहले अभिनव चौधरी और ऋषभ चौधरी भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। नितिन ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हुए कहा कि माता-पिता ने हर समय उनका हौसला बढ़ाया और असफलता के समय भी हताश नहीं होने दिया। उनका कहना है कि सिविल सेवा के माध्यम से समाज की सेवा करना उनका लक्ष्य है। तैयारी करने वालों को उन्होंने सलाह दी कि पूरे फोकस और सही मार्गदर्शन के साथ तैयारी करें।

रैंक की खुशी है पर मनचाही पोस्ट नहीं मिली तो फिर से प्रयास करूंगा: अंकुश

मंदसौर जिले के शामगढ़ क्षेत्र के नारिया बुजुर्ग गांव के अंकुश पाटीदार ने 780वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। 25 वर्षीय अंकुश ने चौथे प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बीएससी कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। अंकुश ने बताया कि उन्होंने दो साल तक दिल्ली में रहकर तैयारी की और लगातार प्रयास जारी रखा। शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपने गांव से प्राप्त की जबकि कॉलेज की पढ़ाई इंदौर से पूरी की। अंकुश ने अपनी सफलता का श्रेय पिता अंबालाल पाटीदार और दादा रामगोपाल पाटीदार को दिया। उनका कहना है कि परिवार से मिले मार्गदर्शन और प्रेरणा ने कठिन समय में हौसला बनाए रखा। परिवार का साथ और अपनापन सफलता पाने के लिए बहुत ही जरूरी है।

अंकुश ने कहा कि 780वीं रैंक आने पर खुशी है लेकिन यदि मनचाही पोस्ट नहीं मिली तो वे फिर से प्रयास करेंगे। उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाना है और अधिकारी बनकर देश और समाज के लिए काम करना चाहते हैं।

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