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Ratlam Railway Mandal: मालगाड़ियों को समय पर चलाने में रतलाम मंडल देश में नंबर वन, रवानगी का अंतर घटाकर 41 मिनट किया

Ratlam News: यार्ड में खड़ी मालगाड़ियों को समय पर चलाने में रतलाम मंडल भारतीय रेलवे में नंबर वन बन गया है। यह मुकाम मंडल ने भारतीय रेलवे के 68 मंडलों में 100 से ज्यादा गुड्स ट्रेन का संचालन करने वाले 39 मंडलों को पीछे छोड़कर हासिल किया है।

मॉनीटरिंग सिस्टम में सख्ती इसकी मुख्य वजह बनी है। उसकी बदौलत मंडल का फरवरी में प्रि-डिपार्चर डिटेंशन (पीडीडी) यानी ट्रेन नोटिस जारी होने से लेकर गुड्स ट्रेन के वास्तविक रवानगी के समय का अंतर सिर्फ 41 मिनट रहा है। रतलाम के बाद अंबाला मंडल 44 मिनट पीडीडी के साथ दूसरे और आगरा मंडल 45 मिनट पीडीडी के साथ तीसरे नंबर रहा है। जनवरी 2026 में रतलाम मंडल का पीडीडी 44 मिनट था। तब अंबाला मंडल 42 मिनट के साथ टॉप पर था। इतना ही नहीं तीन साल में सालाना प्रि-डिपार्चर डिटेंशन में 12 मिनट की कमी आई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

2023 में मंडल का पीडीडी औसतन 52 से 53 मिनट के आसपास था। लगातार सुधार के बाद यह घटकर 45 मिनट के आसपास रह गया है। रेलवे के निर्धारित मापदंड के अनुसार पीडीडी दो घंटे से कम का होना अच्छा माना जाता है। मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने बताया लगातार मॉनीटरिंग और विभागों के आपसी सामंजस्य के कारण पीडीडी कम हुआ है। आगे भी लगातार मॉनिटरिंग जारी रहेगी।

फरवरी में रेलवे का दूसरा रिकॉर्ड

मंडल का फरवरी माह के लिए यह दूसरा रिकॉर्ड है। इसके पहले 28 दिनों में 1.82 मिलियन टन (एमटी) माल लदान किया। यह बीते कई सालों में का सबसे ज्यादा था। इस दौरान रेलवे ने 38 फूडग्रेन रेक (0.10 एमटी) लोड किए, जो फरवरी 2025 के 13 रेक (0.03 एमटी) की तुलना में 25 रेक यानी लगभग 192 प्रतिशत ज्यादा है। इसके पहले 10 जनवरी 2026 को मंडल ने अब तक की सबसे लंबी दूरी वाली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया था। वहीं 1 सितंबर 2025 में मंडल ने गुड्स ट्रेनों की सर्वाधिक एवरेज स्पीड 39.02 किमी प्रति घंटा हासिल करके देश में दूसरा स्थान बनाया था।

क्या है प्रि-डिपार्चर डिटेंशन

प्रि-डिपार्चर डिटेंशन वह औसत समय होता है, जो किसी मालगाड़ी को क्रू साइन ऑन जारी होने के बाद यार्ड या स्टेशन से वास्तविक रूप से रवाना होने तक लगता है। दरअसल गुड्स ट्रेनों को चलाने के लिए सबसे पहले टीए जारी होती है। उसके आधार क्रू बुकिंग, इंजन उपलब्धता, सिग्नल और लाइन क्लीयरेंस की प्रोसेस होती है। टीए जारी होने से लेकर ट्रेन के वास्तविक रवाना होने के बीच लगने वाले इसी समय को पीडीडी कहा जाता है।

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