मंदसौर

नीमच मंदसौर हाईवे पर डिजाइन विवाद में अटका हिंगोरिया ओवरब्रिज, 45 की जगह 65 फीट लंबाई करने पर खींचतान

Neemuch-Mandsaur Highway: नीमच मंदसौर शहरी हाईवे स्थित हिंगोरिया रेलवे फाटक पर बन रहा टी-आकार रेलवे ओवरब्रिज सरकारी सिस्टम में उलझकर रह गया है। जो पुल पिछले वर्ष के अंत तक जनता को सौगात के रूप में मिलना था, वह अब अनिश्चितकाल के लिए अटक गया है। लगभग 76% निर्माण पूरा होने के बाद काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कारण रेलवे और सेतु विकास निगम के बीच ब्रिज के फाटक वाले हिस्से की लंबाई को लेकर मतभेद है।

प्रारंभिक जनरल असेसमेंट ड्राइंग (जीएडी) में रेलवे क्षेत्र में फाटक के सेंटर से करीब 45 फीट लंबाई तय थी। इससे मंदसौर की ओर से आने वाले वाहनों को हिंगोरिया फाटक की तरफ मुड़ने में पर्याप्त कर्व मिलता और सामने से आने वाला ट्रैफिक भी स्पष्ट दिखता। झांझरवाड़ा-औद्योगिक-चीताखेड़ा रोड की ओर जाने वाली तीसरी भुजा पर भी सुरक्षित टर्न की व्यवस्था थी। अब रेलवे 45 फीट की जगह 65 फीट लंबाई चाहता है। तर्क है कि नीमच-मंदसौर-रतलाम रेलखंड पर भविष्य में तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जा सकती है इसलिए पर्याप्त स्पेस जरूरी है।

झांझरवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र-चीताखेड़ा मार्ग का प्रोजेक्ट फंसा

सेतु निगम और ठेकेदार का कहना है कि 65 फीट करने से टी-आकार वाले हिस्से में टर्न का कर्व कम हो जाएगा। इससे भारी वाहनों को हवाईपट्टी- झांझरवाड़ा दिशा में सुरक्षित घुमाव नहीं मिल पाएगा। इससे भोपाल के निशांतपुरा ओवरब्रिज जैसी स्थिति बन सकती है। सूत्रों के अनुसार सेतु निगम ने कुछ माह पहले संशोधित ड्राइंग डिजाइन के साथ संभावित तकनीकी दिक्कतों का उल्लेख करते हुए पत्राचार भी किया था पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ। दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी से दो माह से काम अटका है।

ब्रिज के आसपास सड़कें भी हो रहीं खराब

ब्रिज निर्माण अधूरा होने से जहां लोगों को दिक्कत आ रही है। वहीं ब्रिज के आसपास जो सर्विस रोड बननी थी, वह भी अब तक अधूरी है। जिससे वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। फाटक से नीमच की तरफ सड़क बनाई किन्तु वह जगह-जगह से उखड़ रही है। मंदसौर की तरफ तो काम अब तक शुरू नहीं हुआ और गिट्टी-मिट्टी वाली कच्ची सड़क से ज्यादा दिक्कत है और वाहन हिचकोले लेकर निकलते हैं। वहीं हवाई पट्टी मार्ग की तरफ ब्रिज के एक साइड पक्की सीसी रोड बनी, दूसरी तरफ काम धीमी गति से चल रहा है। इससे दिक्कतें यहां भी बनी हुई हैं।

रेलवे ने ड्राइंग डिजाइन भी भेज दी है

रेलवे मंडल रतलाम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया रेलवे भविष्य की योजना को देखते हुए काम करता है। प्रतिवेदन के बाद ड्राइंग-डिजाइन मप्र शासन को भेजी जा चुकी है। उनकी मंजूरी मिलते ही रेलवे अपना कार्य आगे बढ़ाएगा। रेलवे की तरफ से देरी नहीं हो रही।

वे केवल बात करते हैं, लिखित में कुछ नहीं दिया : एसडीओ

प्रवीण नरवले, एसडीओ, सेतु विकास निगम मंदसौर-नीमच ने बताया कि हिंगोरिया रेलवे फाटक ओवरब्रिज को लेकर रेलवे की तरफ से देरी हो रही है। पहले 45 फीट लंबाई तय थी, किन्तु अब 65 फीट की मांग कर रहे हैं। जो ब्रिज की ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप व्यवहारिक नहीं है। वे केवल बात करते हैं, लिखित में कुछ नहीं दिया। वे 65 फीट का ही प्रस्ताव तो लिखित में दे। हम उस पर भी विचार करने को तैयार हैं।

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