Mandsaur News: मंदसौर जिले की शिक्षित सरपंच ने बदली तस्वीर, 3 साल में 50 युवाओं को दिलाई सरकारी नौकरी

Mandsaur News: धर्म, अध्यात्म, शिक्षा और विकास का अनोखा संगम अगर कहीं दिखता है तो वह है मंदसौर जिले की ग्राम पंचायत घसोई। अपनी प्राचीन विरासत, ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक सोच के साथ घसोई ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो जिले की अन्य पंचायतों से इसे अलग बनाता है। पढ़ी-लिखी सरपंच सुषमाकुंवर देवड़ा की विकासशील सोच और नवाचार की योजना ने पंचायत को नई दिशा दी है।
बीएससी और बीफार्मा तक शिक्षित सरपंच ने गांव के बच्चों और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुराने पंचायत भवन में स्व-खर्च से लाइब्रेरी की स्थापना की है। यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से निःशुल्क तैयारी कराई जा रही है। इसके परिणामस्वरूप बीते तीन वर्षों में 50 से अधिक युक्क-युवतियों को सरकारी नौकरी मिली है।
शिक्षा के क्षेत्र में पंचायत का फोकस मजबूत है। गांव में दसवीं तक शासकीय स्कूल संचालित है, जहां विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था ग्राम पंचायत के माध्यम से की गई है। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो यहां पक्की सड़कें, नालियां, स्वच्छ पेयजल, नियमित सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, तीन स्वच्छता परिसर, मांगलिक भवन, चार आंगनवाड़ी और उप-स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
धार्मिक को सांस्कृतिक दृष्टि से है घसोई गांव की विशेष पहचान
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी घसोई विशेष पहचान रखता है। लगभग पांच हजार पांच सौ वर्ष पुराने इस गांव में आनंदधाम जैन तीर्थ प्रसिद्ध है। गुफामाता का प्राचीन स्थल मंदसौर की ‘वैष्णो देवी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहां बारह शिव मंदिर, बारह हनुमान मंदिर, बारह तालाब और बारह बावड़ियां स्थित हैं। हर्णेश्वर महादेव मंदिर, खाखरा बालाजी, दूधाखेड़ी माता और हरसिद्धि माता प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं।
इतिहास की दृष्टि से घसोई का उज्जैन से विशेष नाता
इतिहास की दृष्टि से घसोई का उज्जैन से गहरा नाता माना जाता है। मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य के पिता अग्रसेन
महाराज की यह प्राचीन राजधानी रही है और अवंतिकापुरी के नाम से इसकी पहचान थी। गांव का पूरा ढांचा उज्जैन की तर्ज पर निर्मित बताया जाता है। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी नटनागर शोध संस्थान में भी घसोई से जुड़े ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। सरपंच प्रतिनिधि सुमेरसिंह देवड़ा के अनुसार ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ से जुड़ने के बाद गांव में अध्यात्म को नई गति मिली है। यहां प्रतिदिन सत्संग, ध्यान और योग का आयोजन होता है। आगे की प्राथमिकताओं में हाईमास्ट लाइट, नए मांगलिक भवन, गुफामाता रोड और अन्य सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
