रतलाम जिले में सोयाबीन की फसल का क्लेम मिला नहीं, तेज हवा बारिश से गेहूं की फसलों को फिर हो गया नुकसान

Ratlam News: पिछले साल अतिवृष्टि से खराब हुई सोयाबीन की फसल का क्लेम तो अभी तक नहीं मिला આતુપુષ્ટ और बारिश व तेज हवा से गेहूं, चना सहित अन्य फसल को फिर नुकसान हो गया है। कई गांवों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ। इसके लिए कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीमें किसानों के खेतों में पहुंचकर सर्वे कर रही हैं।
अब तक 100 से ज्यादा गांवों में टीमें सर्वे कर चुकी हैं ताकि नुकसान का आंकलन कर किसानों को मुआवजा दिया जा सके। दो दिन पहले तेज हवा और बारिश से रतलाम ग्रामीण क्षेत्र सहित जावरा और अन्य गांवों में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ। कई स्थानों पर गेहूं की फसल आड़ी पड़ गई है। किसानों की मांग पर सर्वे किया जा रहा है और किसान टीमों को अपनी परेशानी बता रहे हैं। इस बार गेहूं, चना सहित अन्य फसलों का 3.71 लाख सर्वे नंबर का फसल बीमा हुआ है। इसके लिए जिले के किसानों ने बीमा कंपनी को 11.86 करोड़ रुपए प्रीमियम के रूप में चुकाए हैं।
पिछले साल सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई लेकिन राहत नहीं मिली
पिछले साल 2025 में सितंबर में हुई भारी बारिश से किसानों की सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई थी। किसानों की मांग पर प्रशासन ने सर्वे किया। इसके आधार पर राज्य सरकार ने जिले के 2 लाख से ज्यादा किसानों को 210 करोड़ रुपए की राहत राशि प्रदान की। लेकिन फसल बीमा का क्लेम अब तक नहीं मिला। पिछले साल 2025 में जिले के 4.1 लाख सर्वे नंबर का फसल बीमा हुआ था और किसानों ने इसके एवज में 17 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा कराए थे। प्रोसेस चल रही है-उप संचालक कृषि नीलम चौहान ने बताया कि सोयाबीन की राहत राशि तो किसानों के अकाउंट में डाल दी गई थी। फसल बीमा की प्रोसेस अभी चल रही है।
बीमा करने वाली कंपनी से संपर्क करने पर भी कोई जवाब नहीं मिल रहा
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष ललित पालीवाल ने बताया कि गेहूं के बीमा के लिए किसानों से प्रीमियम काटी गई है लेकिन गेहूं तो दूर, सोयाबीन के बीमा का क्लेम अब तक नहीं मिला। बीमा कंपनी को कॉल किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। किसानों से प्रीमियम वसूल लिया गया तो बीमा क्लेम का भुगतान भी समय पर होना चाहिए। किसान नेता अरविंद पाटीदार ने कहा कि बीमा कंपनी का तो भगवान ही मालिक है। पिछले साल सितंबर में अतिवृष्टि से 20 बीघा की फसल को नुकसान हुआ था। क्लेम के लिए बीमा कंपनी को कॉल किया गया, नियम के मुताबिक 72 घंटे में आना चाहिए था, लेकिन आज तक नहीं आए। प्रीमियम तो तुरंत अकाउंट से काट ली जाती है, लेकिन क्लेम देने में कंपनी किसानों को इंतजार क्यों करवा रही है।

























