Board Exam MP: बोर्ड परीक्षा में बचे शुरू होने में सिर्फ 5 दिन, 26 दिन तक रहेगा दबाव

Jaora News: माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तैयारी के लिए अब छह दिन ही बचे हैं। परीक्षा कार्यक्रम 26 दिन तक का है। इस लंबे शेड्यूल के कारण विद्यार्थियों को पूरे फरवरी और मार्च के पहले सप्ताह तक लगातार परीक्षा मोड में रहना पड़ेगा।
12वीं की परीक्षा 10 फरवरी को अंग्रेजी विषय से शुरू होगी और 7 मार्च को हिंदी के पेपर के साथ समाप्त होगी। इस दौरान 13 फरवरी को भौतिक शास्त्र, 18 फरवरी को रसायन शास्त्र, 23 फरवरी को बायोलॉजी और 25 फरवरी को गणित जैसे कोर और हाई-वेटेज विषय अलग-अलग तारीखों में आयोजित किए जाएंगे। इनके बीच संस्कृत, ड्राइंग एंड डिजाइन, मनोविज्ञान, एनएसक्यूएफ, कृषि, अकाउंटेंसी और अन्य विषय भी शामिल हैं। इससे छात्रों को बार-बार विषय बदलकर तैयारी करनी पड़ेगी। 10वीं की परीक्षाएं 13 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेंगी। 10वीं में 24 फरवरी को गणित और 27 फरवरी को विज्ञान के पेपर होंगे। इन्हें परिणाम के लिहाज से सबसे निर्णायक माना जा रहा है।
समय का रखें खास ध्यान
परीक्षा को लेकर मंडल ने सख्त समय-निर्देश भी जारी किए हैं। सभी परीक्षार्थियों को सुबह 8 बजे तक परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना होगा। 8.45 बजे के बाद किसी भी छात्र को परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा। उत्तर पुस्तिकाएं 8.50 बजे और प्रश्न-पत्र 8.55 बजे वितरित किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से अनुशासन और पारदर्शिता बनी रहेगी।
इसी दरमियान होंगी प्रायोगिक परीक्षाएं
इसी दौरान प्रायोगिक परीक्षाएं भी 10 फरवरी से 10 मार्च तक होंगी। नियमित छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा उनके स्कूल में और स्वाध्यायी छात्रों की परीक्षा आवंटित केंद्रों पर ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर अवकाश के दिनों में भी प्रायोगिक परीक्षाएं कराई जा सकेंगी। इससे स्कूलों पर लिखित परीक्षा और प्रैक्टिकल का दोहरा दबाव रहेगा।
1650 छात्र 12वीं और 1350 10वीं के छात्र देंगे ब्लॉक स्तर पर परीक्षा
ब्लॉक स्तर पर इस साल 11 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 10वीं में और 12वीं मिलाकर करीब 6000 से अधिक विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें लगभग 2800 छात्र 12वीं और 3605 छात्र 10वीं के बताए जा रहे हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्लॉक के कई स्कूलों में बोर्ड परीक्षा का औसत परिणाम 30 से 35 प्रतिशत के बीच रहा है। इससे इस बार छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों तीनों की चिंता बढ़ी हुई है।

























