MP News: मप्र में 40 साल की उम्र के बाद बीमार पड़ रही आबादी, दिल-डायबिटीज सबसे बड़ी चुनौती

MP News: मध्यप्रदेश में बीमारी की तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब कम मेहनत, असंतुलित खानपान, तनाव और नशे की आदतों का असर साफ दिखने लगा है। अब संक्रमण नहीं, बल्कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां प्रदेश की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। दिल, शुगर और दूसरी गंभीर बीमारियां लोगों को जकड़ रही हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में कुल स्वास्थ्य हानि का 50.5% हिस्सा ऐसी ही बीमारियों से जुड़ा था। इनमें इस्कीमिक हार्ट डिजीज 7.7%, डायबिटीज 2% और स्ट्रोक 3.4% हिस्सेदारी के साथ प्रमुख कारण रहे। खास बात यह है कि 40-69 वर्ष आयु वर्ग में ही 37% से अधिक मौतें दर्ज हुईं।
बचपन से बुढ़ापे तक बीमारियों का पैटर्न बदला
2016 में 0-14 वर्ष आयु वर्ग में कुल मौतों का 13.2% हिस्सा रहा, जबकि 15-39 वर्ष में 11.7%, वहीं 40-69 वर्ष में 37.7% और 70 वर्ष से अधिक आयु में 37.3% रहा। 5 साल से कम उम्र में सबसे ज्यादा असर निमोनिया 14.2%, डायरिया 11.6% और समय से पहले जन्म की जटिलताओं 6.1% का रहा। वहीं 40 वर्ष के बाद तस्वीर बदल जाती है। 2016 में इस्कीमिक हार्ट डिजीज कुल स्वास्थ्य हानि का 7.7%, स्ट्रोक 3.4% और डायबिटीज 2% हिस्सेदारी के साथ बड़े कारणों में रहे। 70 वर्ष से अधिक आयु में भी दिल की बीमारी और स्ट्रोक शीर्ष कारणों में रहे।
जोखिम बदले: कुपोषण घटा, ब्लड प्रेशर-शुगर बढ़ी
प्रदेश में बीमारियों के पीछे के कारण भी बदले हैं। 1990 में कुल स्वास्थ्य नुकसान में कुपोषण की हिस्सेदारी 42.1% थी, जो 2016 में घटकर 17.7% रह गई। इसके उलट उच्च रक्तचाप 3% से बढ़कर 7.3% और हाई ब्लड शुगर 1.8% से बढ़कर 5.7% तक पहुंच गई। तंबाकू का असर 4.6% से बढ़कर 5.9% हो गया। पर्यावरणीय खतरे भी कम नहीं हुए। 1990 में वायु प्रदूषण की हिस्सेदारी 13% थी, जो 2016 में भी 10.1% पर बनी रही, जबकि असुरक्षित पानी, स्वच्छता और हाथ धोने की कमी 12.7% से घटकर 5% पर आई।
महिलाओं पर है दोहरी मार खून की कमी से डिप्रेशन तक
महिलाओं में बीमारी का पैटर्न अलग और जटिल है। खून की कमी (आयरन की कमी) महिलाओं में स्वास्थ्य नुकसान के बड़े कारणों में शामिल रही। इसके साथ ही कमर और गर्दन दर्द जैसी हड्डी-मांसपेशियों से जुड़ी दिक्कतें भी बड़ी वजह बनीं। डिप्रेशन और एंग्जायटी (घबराहट) जैसे मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी शीर्ष कारणों में रहे। जोखिम कारकों में कुपोषण की हिस्सेदारी महिलाओं में 14.8% रही, जबकि उच्च रक्तचाप 5% और हाई ब्लड शुगर 4% तक पहुंच गए। वायु प्रदूषण का असर 5.1% दर्ज किया गया।


























