MP Board Exam: मप्र में इस बार ‘स्पीड मोड’ में होगा 10वीं-12वीं बोर्ड का मूल्यांकन, 30 की जगह रोज 60 कॉपियां जांचेंगे शिक्षक

MP News: इस साल 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं केवल व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं हैं। बल्कि मूल्यांकन व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परिणाम जल्दी घोषित करने के उद्देश्य से कॉपी जांचने के नियमों में परिवर्तन किया है। अब तक शिक्षकों को रोज 30 उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का लक्ष्य दिया जाता था लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 45 से 60 कॉपियां रोज कर दिया है। साथ ही डिजिटल निगरानी को सख्त बनाते हुए मूल्यांकन से पहले मोबाइल एप पर उपस्थिति लगेगी, बाद में कितनी कॉपी जांची इसका भी डाटा अपडेट करना पड़ेगा।
रतलाम जिले में कुल 58 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। कक्षा 10वीं में 15 हजार 935 और 12वीं में 11 हजार 478 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शुक्रवार को 10वीं का पहला पेपर उर्दू विषय का होगा। इसमें जिले के 13 केंद्रों पर 399 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। इनमें रतलाम शहर के 8 और जावरा के 5 केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा 12वीं का दूसरा पेपर जिले के सभी केंद्रों पर होगा, जिससे परीक्षा केंद्रों पर गतिविधियां और व्यवस्थाएं पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। इस बार मूल्यांकन कार्य 22 फरवरी से शुरू होगा। मूल्यांकन की समय-सीमा और कार्यप्रणाली दोनों में बदलाव किए हैं। शिक्षकों को शाम 6 बजे तक कार्य करना होगा जबकि पहले कार्य अवधि अपेक्षाकृत कम रहती थी। रोज कितनी कॉपियां जांची गईं, इसका
रिकॉर्ड मोबाइल एप और रजिस्टर दोनों में अपडेट करना अनिवार्य रहेगा। बिना एप पर उपस्थिति दर्ज किए किसी भी शिक्षक को कॉपी जांचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे फर्जी उपस्थिति और लापरवाही पर नियंत्रण लगाने का प्रयास किया है।
प्रति कॉपी 15 से 16 रुपए दिए जाएंगे
भुगतान व्यवस्था भी पूर्व की तुलना में अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाई है। एक उत्तरपुस्तिका जांचने पर 15 से 16 रुपए दिए जाएंगे। यदि कोई शिक्षक बाहर से मूल्यांकन केंद्र पर आता है तो उसे 180 रुपए वाहन भत्ता मिलेगा जबकि स्थानीय शिक्षकों को 135 रुपए का भुगतान किया जाएगा। प्रतिदिन की जांच संख्या और उपस्थिति के आधार पर ही भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
गति और गुणवत्ता का संतुलन बनाना होगा
कुल मिलाकर इस बार बोर्ड परीक्षा केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण चरण साबित होगी। बढ़ी हुई दैनिक जांच संख्या, विस्तारित कार्य अवधि और डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था के बीच गुणवत्ता और गति का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी कसौटी होगी। जिले में 27 हजार से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी इस प्रक्रिया पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।
अप्रैल के पहले हफ्ते में आ सकते हैं परिणाम
शिक्षा विभाग के अनुसार इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन कार्य की गति बढ़ाना, निगरानी मजबूत करना और समय पर परिणाम घोषित करना है। यदि निर्धारित योजना के अनुसार मूल्यांकन पूरा हो जाता है तो संभावना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए जाएं। इसका फायदा कॉलेज एडमिशन में छात्रों को मिलेगा।















































