मप्र में संपत्ति दस्तावेज की कमी से नहीं होगा अब लोन रिजेक्ट, पीढ़ियों से जिस जमीन पर रह रहे हैं वह बनेगी अब बैंक की चाबी

MP News: मप्र में किसान और ग्रामीण जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे हैं, अब वही जमीन उनके लिए बैंक की चाबी बन रही है। ड्रोन सर्वे के जरिए मप्र ने गांवों की आबादी वाली जमीन को पहली बार हवाई नक्शे में दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे बड़ा कवरेज अब मध्यप्रदेश का है, जहां 43 हजार से ज्यादा गांवों का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इस सर्वे के बाद 54 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड बांटे जा चुके हैं, जिससे जमीन के कागज पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं। पहले संपत्ति स्वामित्व दस्तावेज के अभाव में ग्रामीण और किसानों के लोन रिजेक्ट हो जाते थे, लेकिन अब बैंक लोन रिजेक्ट होने का खतरा कम हुआ है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज डिजिटल नक्शे और संपत्ति कार्ड बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए भरोसेमंद प्रमाण बने हैं। यही वजह है कि ड्रोन मैपिंग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है।
1976 कार्ड धारकों को 151.63 करोड़ का लोन
प्रदेश में अधिसूचित सभी 43,014 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें से 39,474 गांवों के लिए 65.65 लाख से ज्यादा संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। अब तक 54.18 लाख कार्ड किसानों और ग्रामीण परिवारों को बांटे जा चुके हैं। प्रदेश में इन 1,976 स्वामित्व कार्ड धारकों को 151.63 करोड़ रुपए का बैंक लोन मिला है।
मंदसौर, सागर और उज्जैन में जमीन के कागज सबसे ज्यादा मजबूत
ड्रोन सर्वे के बाद संपत्ति कार्ड बनने में जिलों के बीच बड़ा फर्क सामने आया है। मंदसौर में सबसे ज्यादा 2.01 लाख से अधिक स्वामित्व संपत्ति कार्ड तैयार हुए हैं। इसके बाद सागर, उज्जैन और खरगोन जैसे जिलों में भी डेढ़ लाख से ज्यादा कार्ड बने हैं, जिससे इन इलाकों में जमीन के कागज सबसे ज्यादा मजबूत हुए हैं। दूसरी ओर मऊगंज, अनूपपुर, शहडोल और अलीराजपुर जैसे जिलों में कार्ड की संख्या पांच हजार से भी कम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां कार्ड कम बने हैं, वहां या तो आबादी वाले गांव कम हैं या फिर कार्ड वितरण की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है।














































