MP News: मंदसौर की लहसुन, विदिशा का शरबती गेहूं, सागर का प्याज नर्मदापुरम का चावल केंद्र की निर्यात हब सूची में शामिल

MP News: अगर आपके खेत का गेहूं विदेश तक जा सकता है, लेकिन रास्ते में ठंडा रखने, जांच कराने और भेजने की व्यवस्था ही न मिले, तो निर्यात सिर्फ कागज पर रह जाता है। मध्यप्रदेश के कई जिलों की यही हकीकत अब संसद में सामने आई है। केंद्र सरकार की ‘डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब’ योजना में विदिशा का शरबती गेहूं, सागर का प्याज, नर्मदापुरम का चावल और गुना की धनिया को निर्यात योग्य उत्पाद माना गया है। इसी तरह मंदसौर का लहसुन, नीमच की धनिया-लहसुन, हरदा की मूंग, रतलाम का काबुली चना, शिवपु शिवपुरी की मूंगफली और रायसेन का चावल भी सूची में शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या किसान इन फसलों को सीधे निर्यात बाजार तक पहुंचा पाएंगे। सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि कई जिलों में कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग हाउस और रीफर वैन की भारी कमी है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए लैब सीमित हैं और ट्रेसबिलिटी सिस्टम कमजोर है। लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुंच की दिक्कतें अलग हैं। नतीजा यह कि निर्यात की संभावना तो है, लेकिन किसान तक उसका फायदा अभी अधूरा है।
इन जिलों में भी निर्यात की मजबूत संभावना
मालवा क्षेत्र में धार और खरगोन की मिर्च व कच्चा कपास, खंडवा और आगरमालवा का अनार, शाजापुर का संतरा, श्योपुर का शहद और अमरूद, शिवपुरी की मूंगफली, बैतूल का गुड़, भिंड की सरसों, सीहोर का गेहूं आटा, दमोह की दाल, देवास का आलू, उज्जैन की प्याज और राजगढ़ का कोदो-कुटकी उत्पाद सूची में हैं। इनमें उत्पादन स्तर और फसल विविधता ऐसी है, जो अंतरराष्ट्रीय मांग से मेल खाती है।
क्या है डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब योजना
केंद्र सरकार ने किसानों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे निर्यात से जोड़ने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब’ योजना शुरू की है। इसके तहत देश के 734 जिलों में ऐसे कृषि और अन्य उत्पाद चिन्हित किए गए हैं, जिनमें निर्यात की क्षमता है। हर जिले में जिला निर्यात संवर्धन समिति बनाई गई है, जो किसानों, एफपीओ और उद्यमियों को निर्यात से जुड़ी जानकारी, प्रशिक्षण और बाजार संपर्क दिलाने का काम करती है। राज्यों में निर्यात रणनीति और जिलों के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान भी तैयार किए गए हैं।
ई-कॉमर्स से जुड़ रहे मप्र के किसान और एफपीओ
केंद्र के मुताबिक ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए ई-कॉमर्स को अहम जरिया बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में ई-सरस पोर्टल पर अब तक 119 उत्पाद ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं, जिनमें कृषि और उससे जुड़े उत्पाद शामिल हैं। सरकार ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, गुणवत्ता प्रमाणन, डिजिटल भुगतान और लॉजिस्टिक्स का प्रशिक्षण दे रही है।


























