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Success Storie: कभी दूसरों की दुकान पर बनाते थे मिठाई, आज दो भाइयों ने कड़ी मेहनत से देश में खड़ा किया खुद का ब्रांड

Success Story Rajasthan: राजस्थान के एक छोटे से गांव के किसान परिवार में जन्मे रामू राम जाट आज मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक हैं। रामू राम के पिता पदमाराम जाट और माता कमला जाट ने उन्हें बचपन से ही सिखाया कि जीवन में सबसे बड़ी पूंजी ईमानदारी और परिश्रम होती है। महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने लुधियाना की एक मिष्ठान दुकान पर काम शुरू किया, जहां हफ्ते में केवल 20 रुपए मिलते थे। उन्हीं पैसों से वे अपनी स्कूल की फीस भरते और छोटे भाई की पढ़ाई में सहयोग करते थे। दिनभर काम और रात को पढ़ाई, यह उनका रोज का संघर्ष था। करीब नौ वर्षों तक दूसरों की दुकानों में काम करते हुए उन्होंने न सिर्फ मिठाई बनाना सीखा, बल्कि यह भी जाना कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। सन् 2013 में रामू राम जाट ने अपने संघर्ष को नई दिशा देते हुए विदिशा में ‘राजस्थान मिष्ठान भंडार’ का आउटलेट ओपन किया। सीमित साधनों में शुरू हुआ यह सफर गुणवत्ता, स्वाद और सेवा के बल पर आगे बढ़ता गया। आज यह बांड प्रदेशभर में अपनी पहचान बना चुका है। उनके स्टोर सिर्फ मिठाइयां नहीं, बल्कि संघर्ष से उपजी प्रेरणा भी परोसते हैं। जो व्यक्ति कभी दूसरों के लिए लड्डु बनाता था, आज वही सैकड़ों परिवारों को रोजगार दे रहा है।

सेवा, सादगी और समाज का समर्पण

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रामू राम समाजसेवा से भी गहराई से जुड़े हैं। वे गौसेवा, सामाजिक संगठनों और किन्सान हितों के लिए सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा, रामू राम भारतीय किसान मजदूर यूनियन (म.प्र.) के प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट महासभा के संगठन मंत्री और विश्व जाट महासंघ के राष्ट्रीय प्रभारी और विदिशा लॉयंस क्लब में कोषाध्यक्ष भी हैं। उनका मानना है कि परिवार ही असली पूंजी होता है। पत्नी साम्मू देवी, पार्टनर गोविंद राम जाट और पूरे परिवार का साथ उनकी सबसे बड़ी ताकत है। इन्हीं को वे अपनी सफलता का श्रेय देते हैं।

एक छोटी-सी दुकान से रखी नींव, आज बनी पहचान

सन् 2008 में टिकूराम जाट ने नर्मदापुरम में ‘राजस्थान मिष्ठान भंडार’ की नींव रखी। यह शुरुआत किसी बड़े निवेश या नामी पहचान के साथ नहीं हुई थी, बल्कि महज एक छोटी-सी दुकान, सीमित संसाधन और बड़ा सपना ही उनकी पूंजी थी। वहीं पिता चुत्राराराम जाट और माता मोहनी देवी ने उन्हें आत्मनिर्भरता, मेहनत और ईमानदारी के संस्कार दिए, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। राजस्थान से मध्यप्रदेश आकर खुद को स्थापित करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने गुणवत्ता और स्वाद के दम पर ग्राहकों का भरोसा जीता और यही उनकी असली पूंजी बनी।

आउटलेट्स से ब्रांड की ओर

इस यात्रा में पत्नी पुष्पा देवी और माई चेनाराम जाट का साय महत्वपूर्ण रहा। उनके खोले गए आउटलेट्स और बाद में तब्दील हुए ब्रांड को प्रदेशभर में पहचान दिलाई। आज ‘राजस्थान मिष्ठान भंडार’ केवल मिठाइयों का नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। अब यह मिठास जल्द ही भोपाल और इंदौर तक पहुंचने वाली है, जो यह साबित करती है कि जिन्हें अवसर नहीं मिलते, वे अपने संघर्ष से खुद अवसर बना लेते हैं।

मेहनत और संघर्ष के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल

चे नाराम जाट का सपना है कि हर राज्य में “राजस्थान मिष्ठान भंडार” के आउटलेट खुलें। वे युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस व्यवसाय से जोड़ रहे हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। उनके पिता मोहन राम जाट और माता मिमी देवी ने सीमित साधनों में रहते हुए ईमानदारी और परिश्रम के संस्कार दिए। सिवनी मालवा में जब उन्होंने 2011 में “राजस्थान मिष्ठान भंडार” की शुरुआत की, तब उनके पास कोई बड़ा सहारा नहीं था। हिम्मत और परिश्रम ही उनकी पूंजी थी। उन्होंने संघर्ष को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। ग्राहकों का भरोसा, गुणवत्ता और सीमित संसाधनों में कारोबार संभालना उनकी खासियत है।

तैयार किए स्थानीय रोजगार

पत्नी देवी और माई सुमेरा राम का कंधे से कंधा मिलाकर साथ देना उनकी सफलता का मजबूत आधार बना। पूरे परिवार की एकजुटता और आपसी सहयोग से यह व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। आज “राजस्थान निष्ठान भंडार” सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी का साधन बन चुका है। इस ब्रांड ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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