मंदसौर

Mandsaur News: मंदसौर मंडी 4 दिन से बंद, रोज होने वाला 10 करोड़ का कारोबार पड़ा ठप्प

Mandsaur Mandi Update: मंदसौर जिले की कृषि उपज मंडी में 750 से ज्यादा व्यापारी रोज करीब 10 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं। इससे प्रशासन को हर साल 35 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व मिलता है। यह मंडी व्यापारी और हम्माल के विवाद के बाद पिछले चार दिनों से बंद है। मंडी प्रशासन की लापरवाही व उदासीनता से न व्यापारी संतुष्ट हैं, न हम्मालों को भरोसा है।

मप्र-राजस्थान के 20 जिलों से आने वाले 6 हजार से ज्यादा किसान भी अव्यवस्थाओं के चलते हर दिन परेशान होते हैं। मंडी बंद रहने से हम्मालों, बाहर लगी छोटी गुमटियों के संचालकों, तुलावटियों व मंडी में रोज कमाकर खाने वालों का रोजगार भी ठप पड़ा है। कृषि उपज मंडी के सचिव पर्वत सिंह सिसौदिया ने बताया कि मंडी की स्थितियों को लेकर दोनों पक्षों से बात करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है कि मंडी सुचारू रूप से जल्द प्रारंभ हो जाए। इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

सुरक्षा में कमी से लगातार हो रही हैं चोरियां

बीते समय में कृषि उपज मंडी में कई घटनाएं हुईं। इनमें कभी उपज की चोरी हुई तो कभी ट्रकों की बैटरियां गायब हो गईं। सितंबर में 3 से 4 गोदामों के ताले भी टूटे थे। मंडी में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ गार्ड हैं, वे भी आधे समय गायब रहते हैं। कुछ समय पहले राजस्थान के छोटी सादड़ी के पास के गांव से किसान लहसुन उपज बेचने मंदसौर मंडी पहुंचा था, उसकी लहसुन ही चोरी हो गई थी। सितंबर में ही संजय मुरड़िया के गोदाम पर भी चोरी हुई थी। व्यापारियों का कहना है कि आए दिन सीसीटीवी भी बंद रहते हैं।

12 जनवरी को मंडी में व्यापारी व हम्माल के बीच माल उतारने को लेकर मामूली सा विवाद हुआ था। लहसुन का कट्टा हम्माल ने नीचे रखा था, इस पर व्यापारी ने जोर से रखने पर मना किया था। फिर अभद्र भाषा के प्रयोग के साथ मारपीट भी हुई। व्यापारियों ने थाने पहुंचकर शिकायत की। इस पर हम्माल के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ। हम्माल संघ का कहना है कि मंडी समिति ने व्यापारी के आवेदन पर प्रकरण दर्ज करवा दिया, जबकि हमारी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। हम्मालों का कहना है कि एकतरफा कार्रवाई न की जाए। इसके बाद उन्होंने काम बंद कर दिया।

अव्यवस्थाओं और टकराव का केंद्र बनी मंडी की गरिमा बचाना सामूहिक जिम्मेदारी

संजय मुरड़िया, पूर्व डायरेक्टर व्यापारी संघ व व्यापारी, मंदसौर ने कहा कि कृषि उपज मंडी की गिरती साख अचानक नहीं, बल्कि वर्षों की अनदेखी का नतीजा है। कभी आदर्श मानी जाने वाली मंडी आज अव्यवस्थाओं, असंतोष और टकराव का केंद्र बन गई है। ई है। प्रशासनिक उदासीनता से स्थितियां दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही हैं। नीलामी बंद होना जैसे फैसले मंडी की समझ रखने वालों को भी खटकते हैं। जरूरत है निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और साझा संचालन व्यवस्था की, जिसमें व्यापारी, किसान और हम्माल सभी की भागीदारी हों। मंडी की गरिमा बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

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