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22 लाख से बना संजीवनी क्लिनिक 2 साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया, अब हो रहा जर्जर

MP News: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में शामगढ़ नगर के वार्ड 14 और 15 के रहवासियों को घर के पास स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से बना ‘मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक’ का भवन दो साल बाद भी ताले में बंद है। करीब 22 लाख रुपए से बना यह भवन आलमगढ़-गांधीनगर क्षेत्र में तैयार है लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर होने लगा है। यह न केवल सरकारी राशि का दुरुपयोग है, बल्कि आमजन को स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध न करवा पाना भी है।

सरकार ने दिल्ली मॉडल की तर्ज पर आम लोगों को नजदीक स्वास्थ्य सुविधा देने की बात कही थी। इसी क्रम में 20 फरवरी 2024 को तत्कालीन विधायक हरदीप सिंह डंग और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस भवन का शिलान्यास किया था। तब उम्मीद जगी थी कि छोटी बीमारियों के इलाज के लिए सिविल अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अब तक क्लिनिक का ताला नहीं खुला। इससे वार्डवासियों में नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइडलाइन के अनुसार निर्माण नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने इसे हैंडओवर लेने से इनकार कर दिया है। विभाग तकनीकी खामियों को कारण बता रहा है। इसी वजह से डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई और सुविधाएं शुरू नहीं हो सकीं। नियमों के अनुसार संजीवनी क्लिनिक में 120 प्रकार की मुफ्त दवाइयां, 68 तरह की पैथोलॉजी जांचें और पांच सदस्यीय टीम की व्यवस्था रहती है। इसमें एक एमबीबीएस डॉक्टर, दो नर्सिंग स्टाफ, एक ऑपरेटर और एक सफाई कर्मी शामिल होते हैं। फिलहाल ये सभी सुविधाएं कागजों तक सीमित हैं।

आस-पास के गांवों को भी मिलना था इसका लाभ

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर दरबार सिंह ने बताया कि भवन तय गाइडलाइन के अनुरूप नहीं है और कुछ निर्माण कार्य बाकी है। इसी कारण विभाग ने इसे हैंडओवर नहीं लिया है। पूरे मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई है और जल्द निर्णय की बात कही गई है। यदि यह संजीवनी क्लिनिक शुरू होता है तो मकड़ावन, आकली दीवान, बोरवनी, बासखेड़ी, सालरिया और जूनापानी के ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा। वार्ड 14 और 15 के लोगों का कहना है कि अगर निर्माण में कमी थी तो शुरुआत में निगरानी क्यों नहीं हुई? 22 लाख खर्च होने के बाद भी इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब लोग प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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