Neemuch News: नहर की जगह पर कॉलोनाइजर ने बनाई दीवार; तहसीलदार ने दिया नोटिस, भूमाफिया में हड़कंप

Neemuch News: नीमच नगर के रामपुरिया तालाब से किसानों को सिंचाई के लिए बनी पुरानी नहर की सरकारी जमीन पर कॉलोनी की दीवार खड़ी किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जल संसाधन विभाग द्वारा वर्षों पहले बनाई गई इस नहर की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की गई थी। शिकायत के बाद तहसीलदार ने कस्बा पटवारी को जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
पटवारी जांच में सामने आया कि सर्वे नंबर 313, रकबा 0.83 हेक्टेयर (इरिगेशन भूमि) पर कॉलोनाइजर द्वारा पूर्व दिशा में 20 फीट चौड़ी और 100 फीट लंबी पक्की दीवार बना रखी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार ने कॉलोनाइजर को 30 जनवरी तक जवाब प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया है। जवाब नहीं देने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। नोटिस जारी होते ही कॉलोनाइजर और नगर के भू-माफिया में हड़कंप मच गया है।
यह कॉलोनी नीमच-मनासा रोड स्थित होटल संजीवनी के पीछे महालक्ष्मी रियल स्टेट कॉलोनी के नाम से विकसित की जा रही है, जिसके कॉलोनाइजर विपिन सोमानी हैं। कॉलोनी के डेवलपमेंट कार्य के दौरान सरकारी नाले की जमीन पर बाउंड्री वॉल बनाने की शिकायत दिनेश और रवि उपाध्याय ने सीएम हेल्पलाइन और तहसीलदार से की थी।
जांच रिपोर्ट में अतिक्रमण की हुई पुष्टि
जांच में सामने आया कि कॉलोनाइजर द्वारा सर्वे नंबर 313, रकबा 0.83 हेक्टेयर (इरिगेशन भूमि) पर पूर्व दिशा में 20 फीट चौड़ी और 100 फीट लंबी पक्की दीवार का निर्माण किया है। यह निर्माण सरकारी नहर-नाले की भूमि पर किया मिला है जो स्पष्ट रूप से अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। मामले में कॉलोनाइजर विपिन सोमानी ने बताया कि नोटिस मिला है। तहसील न्यायालय में जवाब पेश कर अपना पक्ष रखेंगे।
नगर में और भी मामले सामने आए, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सर्वे नंबर 313 आज भी इरिगेशन के नाम दर्ज है। 1970-71 में जब मंदसौर जिला था, तब रामपुरिया तालाब से किसानों के खेतों तक सिंचाई नहर और कच्चा रास्ता बनाया था। अब वह रास्ता भी कॉलोनी के उपयोग में ले लिया है। नगर में ऐसे कई मामले हैं, जहां सरकारी जमीन पर रास्ते बंद किए गए या पक्के निर्माण हो चुके हैं। यहां तक कि कुकडेश्वर क्षेत्र में एक भाजपा नेता द्वारा सरकारी जमीन पर 8 दुकानें बनाए जाने का मामला भी जांच में सही पाया जा चुका है, लेकिन अब तक न तो प्रशासन और न ही नगर परिषद ने कार्रवाई की है।
