Ratlam News: रतलाम में ठेकेदार की जेसीबी से बुझी रेलवे की बत्ती, अस्पताल, कॉलोनी समेत कई ऑफिसों में साढ़े 5 घंटे ब्लैकआउट

Ratlam Railway junction: रेलवे के ठेकेदार की मनमानी खुदाई के कारण मंगलवार को रेलवे अस्पताल, आधी से ज्यादा रेलवे कॉलोनी और आईओडब्ल्यू समेत अन्य कार्यालयों की बत्ती लगभग साढ़े 5 घंटे गुल रही। दरअसल दोपहर 12.30 बजे प्लेटफॉर्म -7 के आगे आईलैंड प्लेटफॉर्म बना रहे ठेकेदार की जेसीबी ने खुदाई के दौरान पॉवर हाउस से आ रही मुख्य केबल काट दी। इससे घर, कार्यालयों और अस्पताल में अंधेरा छा गया। एक साथ इतने बड़े क्षेत्र की बिजली बंद होने से रेलवे महकमे में हलचल मच गई। कुछ देर में मैसेज रेलवे कंट्रोल तक पहुंचा। इससे पता चला कि आइलैंड प्लेटफॉर्म के लिए चल रहे अर्थ वर्क के दौरान बकरा पुल के नीचे से गुजर रही बिजली की केबल जेसीबी से 2 टुकड़े हो गई है। जानकारी लगते ही बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टूटी केबल अंडर ग्राउंड थी, जिसे सुधारना बहुत मुश्किल काम था। इसलिए कर्मचारियों ने पॉवर हाउस से आ रही दूसरी केबल से वैकल्पिक कनेक्शन जोड़ा। इसके बाद लगभग 6 बजे बिजली सप्लाई शुरू हुई। डीआरएम अश्वनी कुमार ने बताया कि ठेकेदार ने गलती की है। निश्चित रूप से फाइन लगेगा। कार्रवाई की जा रही है।
ऐसे पकड़ में आया फाल्ट
रेलवे का डीजल शेड रोड पर पॉवर हाउस बना हुआ है। वहीं से सभी जगह एचटी लाइन गई है। मंगलवार की दोपहर जब सप्लाई बंद होने के बाद चालू करने की कोशिश की गई तो वह बार-बार ट्रिप होती गई। बिजली विभाग के अफसरों ने जांच की तो केबल कटने का पता चला। टीम के पहुंचने के पहले ही ठेकेदार के कर्मचारियों ने कटी हुई केबल एक तरफ कर काम चालू कर दिया था।
रेलवे करेगा ठेकेदार फर्म केपीटीएल से खर्चे की वसूली
केबल कटने से हुए नुकसान और उसे ठीक करने में हुए खर्चे की वसूली ठेकेदार फर्म से होगी। रेलवे ने इसकी तैयारी चालू कर दी है। वर्क केपीटीएल कंपनी ने ले रखा है। बताया जा रहा है कि टेंडर लेने वाली कंपनी ने यह काम पेटी कांट्रेक्ट पर नीमच के ठेकेदार ओमप्रकाश गोयल को दे रखा था। फिलहाल बिजली विभाग ने सारा हिसाब-किताब निकालकर पूरा प्रतिवेदन तैयार कर लिया है। इसके
अनुसार ठेकेदार फर्म पर 5 से 15 लाख रुपए तक का फाइन लगाया जा सकता है। दरअसल रेलवे ने इसे सुधारने के खर्च के अलावा, रेलवे अस्पताल में डीजी सेट चलाने में लगा डीजल का खर्च, कार्यालयों में मेनपॉवर का नुकसान समेत अन्य खर्च भी जोड़ लिया है। इसे मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के माध्यम से हेडक्वार्टर भेजा जाएगा। फाइन लगाने की कार्रवाई वहीं से होगी।


















