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फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वालों पर अब एससी-एसटी एक्ट भी

प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले डॉक्टरों, इंजीनियरों और कर्मचारियों पर अब मूल जाति के अभ्यर्थियों का हक मारने का मामला भी दर्ज होगा। हाई कोर्ट ने 12 आरोपी अफसरों की याचिका खारिज करते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) (यक) व 3(1) (ZA) (E) जोड़ने के आदेश दिए हैं। ये आरोपी 8 से 15 साल तक फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करते रहे।

स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ)

ने पिछले वर्ष प्रकरण दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पढ़ाई के दौरान ओबीसी व अन्य कोटे से लाभ लिया और नौकरी के समय अनुसूचित जनजाति के फर्जी
प्रमाण पत्र लगाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामला जाति निर्धारण का नहीं, बल्कि फर्जी प्रमाण पत्र का है।

एसटीएफ अब 26 अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भी जांच कर रही है, जिससे आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।

किन-किन पर कार्रवाई :

एफआईआर में ग्वालियर के जीआरएमसी के 5 डॉक्टर, 9 शिक्षक, बिजली विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारी, उद्यान विभाग के संयुक्त संचालक, 4 आरक्षक, एक सूबेदार, एक एसआई और न्यायालय के तीन स्टेनो शामिल हैं।

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