Ratlam News: रतलाम के जावरा क्षेत्र में ई-टोकन के बावजूद नहीं मिल रहा यूरिया, किसान सीएम हेल्पलाइन पर कर रहे शिकायतें

Ratlam News: रतलाम के जावरा क्षेत्र में किसानों को यूरिया के लिए ई-टोकन होने के बावजूद परेशानी उठानी पड़ रही है। यूरिया की किल्लत को देखते हुए तथा कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने ई-टोकन सिस्टम शुरू किया था। अब किसान कियोस्क सेंटरों से या ई-टोकन एमपी कृषि पोर्टल पर जाकर स्वयं के मोबाइल से ई-टोकन तो बना रहे लेकिन फिर भी खाद नहीं मिल रहा। विवाद के साथ ही सीएम हेल्पलाइन शिकायतें भी बढ़ रही हैं।
ग्राम बड़ायला चौरासी निवासी उदय सिंह पिता रण सिंह ने बताया कि मैंने ई-टोकन लेकर मंगलवार को सेजावता गोदाम पर दिया और एक बोरी यूरिया की मांग की लेकिन पहले तो कहा ओरिजनल दस्तावेज लेकर आओ। फिर बोला कि परसों आना। ऐसा कहकर वापस भेज दिया। आधार से वेरिफाई करके ई-टोकन बनवाया और खाद नहीं मिला तो फिर ई-टोकन का क्या मतलब रह गया है। 7 बीघे में सिर्फ एक बोरी खाद के लिए भी तीन-तीन चक्कर लगाएंगे तो खेतों पर सिंचाई व अन्य जरूरी काम कब करेंगे।
हालांकि सेजावता सरकारी खाद गोदाम प्रभारी राजाराम मिसकरे का कहना है कि ई-टोकन तो आधार से बन जाता है लेकिन किसी किसान ने यदि पहले खाद ले लिया और वह दोबारा ई-टोकन बनाकर आ रहा तो पहचान कैसे होगी। इसलिए ई-टोकन के साथ किसानों से पहले की तरह आधार, पावती, सोसायटी एनओसी ली जा रही है ताकि सत्यापन हो सके। ई-टोकन तो सिर्फ लाइन से बचने की व्यवस्था लेकिन किस किसान ने कितना खाद लिया, इसकी एंट्री पावती में रहती है। कई किसान ऐसे आ रहे है, जिन्होंने पहले खाद ले लिया और वह इंट्री दर्ज होने से पावती नहीं दे रहे। फिर पावती मांगने पर विवाद व अनावश्यक शिकायतें कर रहे है। खाद की किल्लत नहीं है। 200 टन यूरिया उपलब्ध है और जो ई-टोकन व ओरिजनल दस्तावेज ला रहे, उन्हें खाद दिया जा रहा है।















