मन की पवित्रता, वचन की मधुरता, काया का सदुपयोग अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला’

आध्यात्मिक चेतना अभियान द्वारा ‘नेचर क्योर सेंटर’ के सहयोग से प्राकृतिक चिकित्सा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए मन, वचन और काया का संतुलित व सकारात्मक उपयोग आवश्यक है। प्राकृतिक चिकित्सा और योग ऐसी जीवन पद्धतियां हैं, जो न केवल रोगों से बचाव करती हैं, बल्कि व्यक्ति को दीर्घकाल तक स्वस्थ रखती हैं।
योग गुरु सुरेंद्र जैन ने कहा कि प्रकृति ने रोग उत्पन्न नहीं किए हैं, बल्कि रोग मनुष्य की गलत जीवनशैली और सोच का परिणाम हैं। जो व्यक्ति स्वयं को स्वस्थ रखने की दृढ़ कामना करता है, वह सामान्यतः स्वस्थ रहता है। मन की पवित्रता, वचन की मधुरता और काया का सदुपयोग ही अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर जीवन में आई कृत्रिमता ही अधिकांश रोगों का कारण बन रही है। प्रकाश रातड़िया ने कहा कि सीमित, सात्विक, प्राकृतिक शाकाहारी आहार रोगमुक्त जीवन का सरल उपाय है। प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी जीवन पद्धति है, जो रोग उत्पन्न होने से पहले ही उनकी रोकथाम करती है। नेचर क्योर सेंटर के प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. हमीद शाह एवं जिलानी ने स्वागत भाषण में कहा कि स्वास्थ्य सम्मत दिनचर्या अपनाकर व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। संगोष्ठी में प्रकाश कल्याणी, राजकुमार जसवंत, अभय जैन, सलीम भाई और बाबूखां सिंगल ने भी अपने विचार रखे। वासुदेव खेमानी, कृष्णकुमार जोशी, राजेंद्र दायमा और प्रकाश चंदवानी ने आयोजन में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत समाजसेवी यशवंत प्रजापति के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। संयोजक विनोद शर्मा ने अभियान की गतिविधियों की जानकारी दी। संचालन रमेश ब्रिजवानी ने किया। आभार निरंजन भारद्वाज ने माना।
