Ratlam Railway Mandal: हर्कियाखाल-मल्हारगढ़ के बीच दोहरीकरण हुआ पूरा, 100 की जगह 110 की स्पीड से दौड़ने लगीं ट्रेनें

Indian Railway: नीमच से मल्हारगढ़ तक रेल खंड का दोहरीकरण हो चुका है। इससे अब इस ट्रैक पर 110 किमी की स्पीड से ट्रेनें चलने लगी हैं। पैसेंजर से लेकर एक्सप्रेस रेल ट्रेनों को सामने से आने वाली गाड़ियों या सुपरफास्ट ट्रेन के कारण लूप लाइन पर नहीं रोकना पड़ रहा है। अधिकतर ट्रेन समय पर स्टेशन पहुंच रही हैं। यात्रियों को सुविधा होने के साथ समय की बचत हो रही है। दूसरी तरफ मालगाड़ियों को अब ट्रैक के बीच लंबे समय तक खड़ा नहीं होना पड़ा रहा है। इधर नीमच स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 (गुड्स) पर शेड निर्माण प्रगति पर है।
रतलाम-मंदसौर-नीमच-चित्तौड़गढ़ रेलवे खंड के नीमच से चित्तौड़गढ़ खंड में दोहरीकरण हो चुका है। अब नीमच से रतलाम के बीच 133 किमी लंबे ट्रैक पर काम जारी है। इसमें 72 फीसदी से ज्यादा कार्य पिछले साल हो चुका था। नीमच जिले के खंड में आने वाले नीमच से लेकर मल्हारगढ़ तक का काम पूरा हो चुका है। इससे नीमच से लेकर मल्हारगढ़ तक 100 की बजाय सीधे 110 किमी की स्पीड से ट्रेनें चल रही हैं। इससे ट्रेनों के साथ मालगाड़ियां समय पर गंतव्य तक पहुंच रही हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार यदि आगे से लेट है या कोई अन्य कारण है तभी कोई ट्रेन लेट होती है।
पिछले महीने फाउंडेशन पूर्ण होने के बाद अब किए जा रहे हैं पिलर खड़े
नीमच रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-4 (गुड्स) पर शेड-निर्माण कार्य प्रगति पर है। यहां पिछले महीने फाउंडेशन पूर्ण होने के बाद अब पिलर खड़े किए जा रहे हैं। यहां जो शेड तैयार किया जा रहा है, वह हर्कियाखाल रेलवे स्टेशन पर बने आधुनिक शेड की तरह बना रहे हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार यह कार्य पूर्ण होते ही फरवरी के मध्य में इन शेड पर चादर लगाने सहित अन्य कार्य प्रारंभ होगा। लक्ष्य है कि मार्च तक कार्य पूर्ण किया जाए। इसके पूर्ण होने से सबसे ज्यादा फायदा नीमच के मंडी व्यापारियों को होगा। गेहूं, सोयाबीन, लहसुन से से लेकर अन्य उपज जो व्यापारी ट्रेनें से भेजते हैं, उनका माल शेड के कारण बारिश के मौसम में भी सुरक्षित रहेगा। उपार्जन खरीदी, पीडीएस का गेहूं-चावल और यूरिया आदि उर्वरक का रैक पाइंट होने से इन्हें भी सुविधा होगी।
15 मिनट का समय बचेगा: अहीर
रिटायर्ड मेल एक्सप्रेस लोको पायलट अर्जुनसिंह अहीर के पास ट्रेन चलाने का 40 साल से ज्यादा समय का अनुभव है। उन्होंने बताया सिंगल ट्रैक होने के कारण क्रॉसिंग के दौरान कम से कम 12 से 15 मिनट रुकना पड़ता था। दोहरीकरण से एक के पीछे सभी गाड़ियां चलाई जा जाती हैं। यात्री गाड़ी के साथ अब मालगाड़ी भी बिना वजह मल्हारगढ़ से नीमच के बीच नहीं रुकती हैं। समय बचत है।
